अंबाला के राहुल की कामयाबी: 6 बार मिली असफलता, फिर 7वीं कोशिश में बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट करियर एक घंटा पहले 5
अंबाला के रहने वाले राहुल धाकड़ ने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल कर मिसाल कायम की है। सातवीं बार में SSB परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पहली बार घर लौटने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया।

असफलता को बनाया सीढ़ी

कहावत है कि लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। अंबाला के रहने वाले राहुल धाकड़ ने इस कहावत को अक्षरश: सच साबित किया है। भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने का सपना देखने वाले राहुल के लिए यह राह आसान नहीं थी। उन्हें लगातार कई बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 6 बार मिली नाकामी के बावजूद उन्होंने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया और 7वीं बार में SSB परीक्षा उत्तीर्ण कर लेफ्टिनेंट बनने का गौरव हासिल किया।

ट्रेनिंग के बाद घर वापसी पर भव्य स्वागत

चेन्नई स्थित अकादमी में करीब एक साल तक कठिन ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जब राहुल पहली बार अपने गृह नगर अंबाला पहुंचे, तो उनके स्वागत के लिए पूरा मोहल्ला उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों की थाप और फूलों की बारिश के बीच परिजनों और स्थानीय निवासियों ने राहुल का जोरदार स्वागत किया। लंबे समय तक घर से दूर रहने के बाद जब राहुल ने अपने माता-पिता और कॉलोनी के लोगों के मुस्कुराते चेहरे देखे, तो वह पल उनके लिए बेहद भावुक और यादगार बन गया। परिजनों की आंखों में अपने बेटे की इस बड़ी कामयाबी को लेकर साफ खुशी और गर्व झलक रहा था।

दिल्ली से शुरू हुआ था संघर्ष का सफर

राहुल ने अपनी इस सफलता के पीछे के संघर्ष को साझा करते हुए बताया कि भारतीय सेना में जाने का जज्बा उनके मन में बचपन से ही था। उन्होंने दिल्ली से B.Com की पढ़ाई पूरी की और इसी दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी करना शुरू कर दिया था। राहुल का कहना है कि जब शुरुआत में उन्हें कई प्रयासों के बाद भी सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी कमियों पर ध्यान केंद्रित किया। हर बार मिली असफलता के बाद उन्होंने खुद का विश्लेषण किया और अपनी तैयारी को और भी अधिक मजबूत बनाया। उनकी यही निरंतरता और अनुशासन आज रंग लाया है।

पिता का छलका गर्व

राहुल की इस उपलब्धि से उनके पिता पंकज का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि राहुल जब दसवीं कक्षा में था, तभी से उसने स्पष्ट कर दिया था कि वह सेना में नौकरी करेगा और देश की सेवा करेगा। आज उसका वह सपना हकीकत में बदल गया है। पंकज, जो खुद एक छोटा सा बिजनेस चलाते हैं, ने भावुक होकर कहा कि राहुल की मेहनत सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य को प्राप्त करने के दौरान चाहे कितनी भी बाधाएं क्यों न आएं, लेकिन यदि व्यक्ति का हौसला और जज्बा कायम रहे, तो सफलता निश्चित है।

युवाओं के लिए एक प्रेरणा

अंबाला के स्थानीय लोगों का मानना है कि राहुल की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार असफल होकर हताश हो जाते हैं। 6 बार की असफलता के बाद भी राहुल का 7वीं बार में बाजी मार लेना यह सिखाता है कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती, इसके लिए धैर्य और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। राहुल ने न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे अंबाला जिले को गौरवान्वित किया है। अब भारतीय सेना का हिस्सा बनकर राहुल देश की सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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