जमुई के 'रिवर मैन' नंदलाल सिंह: 25 साल से नदियों को बचाने के लिए जारी है इनका संघर्ष बिहार एक घंटा पहले 2
जमुई के नंदलाल सिंह पिछले पच्चीस वर्षों से बिहार की नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए समर्पित हैं, जिन्होंने निजी दुखों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद अपना संकल्प नहीं छोड़ा।

बाढ़ की त्रासदी से शुरू हुआ सफर

बिहार के जमुई जिले के रहने वाले नंदलाल सिंह एक ऐसी मिसाल बन चुके हैं, जिन्हें आज लोग 'रिवर मैन' के नाम से जानते हैं। करीब 25 साल पहले आई एक विनाशकारी बाढ़ की त्रासदी ने उनके मन पर इतनी गहरी छाप छोड़ी कि उन्होंने अपना पूरा जीवन नदियों के संरक्षण को समर्पित करने का निर्णय लिया। नंदलाल सिंह का मानना है कि नदियों का स्वरूप बदलना मानव समाज के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने जमुई की स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया कि जिले में कुल 32 नदियां थीं, जिनमें पहले सालों-साल पानी भरा रहता था। लेकिन आज हकीकत यह है कि बरसात के मौसम में भी इन नदियों में जल का नामोनिशान नहीं मिलता। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि इन नदियों को समय रहते नहीं बचाया गया, तो आने वाले समय में जल संकट का सामना करना अनिवार्य हो जाएगा।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

नंदलाल सिंह के लंबे और अथक संघर्ष का परिणाम यह है कि उन्हें देशभर में सराहा जा रहा है। पिछले महीने नागपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में उन्हें भारतीय नदी परिषद द्वारा आयोजित राष्ट्रीय नदी मंथन 2024 में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मशहूर बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर जैसी हस्तियों की मौजूदगी ने उनके कार्य की गंभीरता को रेखांकित किया। इसके अतिरिक्त, उन्हें जल शक्ति मंत्रालय द्वारा प्रतिष्ठित जल प्रहरी सम्मान भी प्रदान किया जा चुका है। कुल मिलाकर, अब तक नंदलाल सिंह को एक दर्जन से अधिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है, जो उनके पर्यावरण के प्रति लगाव का प्रमाण हैं।

प्रेरणा और मार्गदर्शन का सफर

अपने काम की शुरुआत को याद करते हुए नंदलाल सिंह ने बताया कि उन्होंने यह सफर देहरादून में नमामि गंगे के प्रमुख पद्मश्री अनिल प्रकाश जोशी, भारतीय नदी परिषद के रमणकांत और विख्यात जल पुरुष राजेंद्र सिंह जैसे दिग्गजों के संरक्षण और मार्गदर्शन में शुरू किया था। आज भी वे उसी संकल्प के साथ इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जल यात्राओं से लेकर नदी बचाओ जैसे कई बड़े आंदोलनों और अभियानों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है।

व्यक्तिगत त्रासदी के बावजूद अडिग संकल्प

नंदलाल सिंह के लिए यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में जब उन्होंने इस अभियान की शुरुआत की थी, तब उनके बच्चे काफी छोटे थे और उनके सिर पर घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी थी। परिवार के भरण-पोषण का साधन उनके पैतृक खेत थे। उस कठिन समय में उनकी पत्नी ने उन्हें हर कदम पर साथ दिया। वे न केवल उनके घर और बच्चों की देखभाल करती थीं, बल्कि कई बार उनके साथ नदी बचाओ आंदोलनों में भी शामिल होती थीं।

हालांकि, 2014 में पत्नी के निधन ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पत्नी के जाने के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई, फिर भी उन्होंने अपने मिशन से कभी मुंह नहीं मोड़ा। उनका मानना है कि नदियों को बचाना अब अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।

पानी का घटता स्तर और भविष्य का संकट

नंदलाल सिंह ने जल संकट पर गहरा विश्लेषण करते हुए कहा कि पहले लोग सीधे नदी का पानी पिया करते थे। धीरे-धीरे समय बदला और लोग कुएं, फिर चापानल और अब बोरिंग के पानी पर निर्भर हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बोरिंग के जलस्तर का पानी भी खत्म हो गया, तो मानव सभ्यता के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। इसलिए, जमुई सहित पूरे बिहार की नदियों को पुनर्जीवित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनका यह अनवरत संघर्ष समाज को यह संदेश दे रहा है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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