कटहल किसानों के लिए हरा खजाना, सही प्रजाति और देखभाल से साधारण पेड़ भी देगा बंपर पैदावार उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
बढ़ती लागत के बीच कटहल कम खर्च में लंबे समय तक आमदनी देने वाला बहुउपयोगी पेड़ है। विशेषज्ञ के अनुसार सही प्रजाति, समय पर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल अपनाकर किसान कम फलन वाले पेड़ों से भी अच्छा उत्पादन ले सकते हैं।

खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच किसान अब ऐसे फल और पेड़ों की ओर रुख कर रहे हैं, जो कम खर्च में सालों तक अच्छी आमदनी देते रहें। कटहल इसी तरह का एक बहुउपयोगी पेड़ है, जिसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हरा खजाना माना जाता है।

क्यों खास है कटहल

कच्चे कटहल से स्वादिष्ट सब्जी तैयार होती है, पका हुआ फल बेहद मीठा होता है और इसके बीज भी काफी काम आते हैं। बीजों से बनी सब्जी और दूसरे व्यंजन लोगों को खूब भाते हैं, जबकि गांवों में बीजों को भूनकर भी खाया जाता है। इसी वजह से कटहल को गरीबों का बादाम भी कहा जाता है। सालभर बनी रहने वाली इसकी मांग किसानों को अच्छी कमाई का जरिया देती है।

अलग-अलग प्रजातियां, अलग उपयोग

श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलिया के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार सिंह बताते हैं कि कटहल की अलग-अलग प्रजातियों का इस्तेमाल अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता है। कुछ किस्में खासतौर पर सब्जी के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं, जबकि कुछ की पकी फलियां खाने में बेहद स्वादिष्ट होती हैं।

उनके अनुसार कलमी पौधे आमतौर पर 3 से 4 वर्ष में फल देना शुरू कर देते हैं, जबकि बीज से तैयार पौधों में फल आने में 5 से 6 वर्ष तक का समय लग सकता है।

फल कम आने की असली वजह

कई किसानों की शिकायत रहती है कि पेड़ तो अच्छी तरह बढ़ गया है, लेकिन उस पर फल बहुत कम लगते हैं या बिल्कुल नहीं आते। प्रो. सिंह के मुताबिक इसकी मुख्य वजह पौधों में पोषक तत्वों की कमी है।

पोषण और देखभाल का तरीका

इस कमी को दूर करने के लिए पहली बारिश के बाद पेड़ के चारों ओर अच्छी तरह निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। यदि पौधा लगभग 5 वर्ष का हो चुका है, तो उसमें कम से कम 2 टोकरी सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट जरूर डालनी चाहिए।

इसके साथ ही लगभग 500 ग्राम अमोनियम फास्फेट, 200 ग्राम यूरिया और उपलब्ध होने पर 4 से 5 किलोग्राम मछली या हड्डी का चूर्ण मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इसके बाद सिंचाई करने से पौधे को पर्याप्त पोषण मिलता है और फलन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलती है। जिन पेड़ों पर फल नहीं लग रहे, उनमें भी ये उपाय अपनाने से अगले सीजन में फूल और फल आने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

फल झड़ने से बचाने का उपाय

प्रो. सिंह बताते हैं कि नवंबर माह के आसपास 2% बोरिक एसिड घोल का छिड़काव करने से फल झड़ने और खराब होने की समस्या काफी हद तक कम की जा सकती है।

स्थायी आय का मजबूत साधन

विशेषज्ञ का मानना है कि सही पोषण, समय पर देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसान कटहल की खेती को स्थायी आय का मजबूत जरिया बना सकते हैं। एक बार लगाया गया कटहल का पेड़ कई वर्षों तक लगातार फल देता रहता है। यानी एक बार पौधा लगाइए और सालों तक आमदनी पाइए।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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