उपनाम: ग्रामीण अर्थव्यवस्था
बागेश्वर: प्रेमा कोरंगा की डेयरी ने बदली पशुपालकों की तकदीर, हर महीने हो रही एक लाख रुपये से अधिक की कमाई
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में एक स्थानीय डेयरी उद्यम ग्रामीण पशुपालकों के लिए आर्थिक संबल बन गया है, जहाँ दूध की नियमित बिक्री से किसानों को हर महीने लाखों की आय सुनिश्चित हो रही है।
बांस की दुनिया है बेहद विविध, पूसा में 9 दुर्लभ प्रजातियों पर हो रहा है खास शोध
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में बांस की नौ दुर्लभ प्रजातियों पर शोध किया जा रहा है। यहां छात्र न केवल इनकी विशेषताओं को समझ रहे हैं, बल्कि इनके निर्माण से लेकर खाद्य सामग्री तक के बहुआयामी उपयोगों को भी सीख रहे हैं।
भैंस पालन का मुनाफे वाला तरीका: पाड़ी पालकर लाखों कमाने का पूरा गणित
पशुपालन के जरिए अच्छी कमाई करने के लिए छोटे स्तर पर शुरुआत करना एक बेहतरीन विकल्प है। कम लागत में भैंस की पाड़ी खरीदकर उसे बड़ा करना एक सफल और कम खर्चीला बिजनेस मॉडल बन गया है।
भैंस पालन का नया मॉडल: कम लागत में चार गुना मुनाफा कमाने का मौका
पशु विशेषज्ञों ने कम निवेश में भैंस पालन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने का एक सफल मॉडल साझा किया है, जिसमें पाड़ी को तैयार कर बेचना बेहद लाभदायक साबित हो रहा है।
कटहल किसानों के लिए हरा खजाना, सही प्रजाति और देखभाल से साधारण पेड़ भी देगा बंपर पैदावार
बढ़ती लागत के बीच कटहल कम खर्च में लंबे समय तक आमदनी देने वाला बहुउपयोगी पेड़ है। विशेषज्ञ के अनुसार सही प्रजाति, समय पर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल अपनाकर किसान कम फलन वाले पेड़ों से भी अच्छा उत्पादन ले सकते हैं।
बिहार का अनोखा 'तालाबों का गांव', जहां बाढ़ की मार ने लिख दी खुशहाली की नई कहानी
पूर्वी चंपारण के संग्रामपुर स्थित बरियारिया गांव में आज करीब 200 तालाब हैं और ग्रामीण बड़े पैमाने पर मछली पालन कर आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके हैं। कभी बाढ़ में फसलें बहाने वाला यह गांव अब समृद्धि की मिसाल बन गया है।
हजारीबाग का यह गांव बना 'मैंगो विलेज', आम की खेती ने संवारी सैकड़ों परिवारों की जिंदगी
हजारीबाग जिले के ईचाक प्रखंड स्थित आरा गांव में 2000 से अधिक आम के पेड़ और दर्जनों बागान हैं, जो सैकड़ों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार बन चुके हैं। यहां के स्वादिष्ट आमों की मांग झारखंड के साथ-साथ बिहार के कई शहरों तक है।
जंगली आम के छिलकों से बन रहा आमचूर, सरगुजा के ग्रामीणों को मिल रही पक्की कमाई
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर क्षेत्र में ग्रामीण आम के छिलके सुखाकर आमचूर बना रहे हैं, जो बाजार में 100 से 120 रुपये प्रति किलो तक बिकता है और परिवारों को अतिरिक्त आमदनी दे रहा है।