जबलपुर RDVV में 'डिजिटल इंडिया' का सपना अधूरा, 30 छात्रों के लिए सिर्फ 5 चालू कंप्यूटर मध्य प्रदेश एक महीने पहले 21
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में साइबर सिक्योरिटी जैसा हाई-टेक कोर्स तो शुरू हो गया, लेकिन लैब में मौजूद 30 में से महज 5 कंप्यूटर ही चालू हालत में हैं। न वाई-फाई है, न लेटेस्ट सॉफ्टवेयर, और छात्र पुरानी मशीनों के सहारे डिग्री लेने को मजबूर हैं।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में अगर आप साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में भविष्य का विशेषज्ञ बनने का सपना संजो रहे हैं, तो पहले हकीकत जान लेना जरूरी है। डिजिटल युग के सबसे ज्यादा मांग वाले इस कोर्स की जमीनी सच्चाई बेहद निराशाजनक और चौंकाने वाली है।

हाई-टेक कोर्स, पर सुविधाएं नदारद

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने आधुनिक और 'हाई-टेक' कोर्स तो शुरू कर दिए, मगर इन्हें पढ़ाने के लिए संबंधित विभाग के पास न तो पर्याप्त कंप्यूटर हैं और न ही पढ़ाई का कोई व्यवस्थित माहौल। यहां छात्र कागज पर तो 'साइबर एक्सपर्ट' की डिग्री हासिल कर रहे हैं, लेकिन असल में उन्हें पुरानी और बेकार पड़ी मशीनों से जूझना पड़ रहा है।

लैब का रियलिटी चेक

जब यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन की लैब की पड़ताल की गई, तो स्थिति हैरान करने वाली निकली। लैब में रखे कुल 30 कंप्यूटरों में से सिर्फ 5 ही किसी तरह काम कर रहे हैं। बाकी बचे 25 कंप्यूटर या तो पूरी तरह बंद पड़े हैं या इतने पुराने पड़ चुके हैं कि आज के आधुनिक सॉफ्टवेयर का भार तक नहीं उठा पाते।

कर्मचारियों के मुताबिक, मॉनिटर से लेकर प्रोसेसर तक हर उपकरण आउटडेटेड हो चुका है, जिसकी वजह से छात्रों के लिए प्रैक्टिकल करना लगभग असंभव हो गया है।

एक कंप्यूटर पर 10 से 12 छात्र

हालात इतने खराब हैं कि एक ही मशीन पर 10 से 12 छात्रों को एक साथ बैठकर काम करना पड़ता है। साइबर सिक्योरिटी जैसे विषय के लिए जहां हाई-स्पीड इंटरनेट और नवीनतम सॉफ्टवेयर अनिवार्य होते हैं, वहां छात्रों को न वाई-फाई मिल रहा है और न ही काम करने लायक कंप्यूटर।

अपने खर्च पर लैपटॉप खरीदने को मजबूर छात्र

छात्रा प्रियंका यादव और रूपाली मिश्रा का कहना है कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्हें मजबूरन अपने ही खर्च पर लैपटॉप खरीदने पड़ रहे हैं। विश्वविद्यालय पूरी फीस वसूल रहा है, मगर सुविधाओं के नाम पर छात्रों को केवल आश्वासन ही थमाए जा रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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