चिकन बिरयानी में निकला मरा कीड़ा, रेस्टॉरेंट पर ₹13,000 का जुर्माना और हर रविवार 2 प्लेट बिरयानी खिलाने का आदेश व्यापार 2 घंटे पहले 2
पुडुचेरी के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने चिकन बिरयानी में मरा हुआ कीड़ा मिलने के मामले में रेस्टॉरेंट को 13,000 रुपये मुआवजा देने और शिकायतकर्ता को 5 हफ्तों तक हर रविवार 2 प्लेट ताजा बिरयानी खिलाने का आदेश दिया है।

पुडुचेरी के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक दिलचस्प फैसले में रेस्टॉरेंट को 13,000 रुपये के मुआवजे के साथ-साथ 5 हफ्तों तक प्रत्येक रविवार दो प्लेट मुफ्त चिकन बिरयानी देने का आदेश सुनाया है। यह मामला 8 दिसंबर, 2025 का है, जब 26 वर्षीय मणिकंदन को चिकन बिरयानी में एक मरा हुआ कीड़ा मिला था। इसके बाद उन्होंने 26 दिसंबर, 2025 को रेस्टॉरेंट के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के बाद आयोग ने रेस्टॉरेंट को मुआवजे के रूप में 10,000 रुपये और कानूनी कार्यवाही पर हुए खर्च के लिए 3,000 रुपये यानी कुल 13,000 रुपये चुकाने को कहा। साथ ही मणिकंदन को 5 हफ्तों तक हर रविवार 2 प्लेट ताजा चिकन बिरयानी परोसने का भी निर्देश दिया।

दोस्त के साथ खाने गया था उपभोक्ता

8 दिसंबर, 2025 को मणिकंदन अपने एक दोस्त के साथ एम.जी. रोड पर मौजूद एक मशहूर रेस्टॉरेंट में चिकन बिरयानी खाने पहुंचे थे। उन्होंने दो प्लेट चिकन बिरयानी का ऑर्डर दिया, जिसके लिए कुल 558 रुपये का भुगतान किया। खाना खाते समय मणिकंदन को बिरयानी में एक मरा हुआ कीड़ा दिखाई दिया, जो देखने में मक्खी जैसा लग रहा था। उन्होंने इस कीड़े की तस्वीर ली और वीडियो भी बनाया, जिसे बाद में आयोग के समक्ष सबूत के तौर पर रखा गया। रेस्टॉरेंट को इस घटना की जानकारी गूगल रिव्यू के जरिए मिली थी।

आयोग ने रेस्टॉरेंट को ठहराया दोषी

मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने रेस्टॉरेंट को दोषी माना। आयोग ने कहा कि खाने-पीने की सेवा देने वाले प्रतिष्ठानों की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है कि वे स्वच्छता और साफ-सफाई के सख्त मानकों का पालन करें। ऐसे प्रतिष्ठान 'खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006' के दायरे में आते हैं और उन्हें खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 की अनुसूची 4 में तय मानकों का पालन करना अनिवार्य है। इन मानकों में स्वच्छता बनाए रखना, भोजन को साफ-सुथरे ढंग से संभालना और परिसर को स्वच्छ रखना शामिल है। आयोग ने स्पष्ट किया कि भोजन में कीड़ा मिलना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

बिना वकील खुद रखा अपना पक्ष

रिपोर्ट के अनुसार, मणिकंदन ने इस मामले में किसी वकील की मदद लेने के बजाय खुद ही अपना पक्ष रखा था। आयोग ने माना कि भोजन में मरे हुए कीड़े की मौजूदगी उपभोक्ता की सेहत और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती थी। उपभोक्ता आयोग ने 30 अप्रैल, 2026 को मणिकंदन के पक्ष में अपना फैसला सुनाया।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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