INS अग्रय: समंदर में दुश्मन की पनडुब्बियों का काल, भारतीय नौसेना की ताकत में हुआ इजाफा भारत एक महीने पहले 49
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय नौसेना को तीन नए युद्धपोत सौंपे हैं, जिनमें से INS अग्रय को दुश्मन की पनडुब्बियों को नष्ट करने में माहिर माना जा रहा है। यह पोत हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में भारत की रणनीतिक पकड़ को और अधिक मजबूत करेगा।

समुद्री सुरक्षा के लिए नई रणनीति

भारतीय नौसेना की मारक क्षमता में लगातार इजाफा हो रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून 2026 को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया। इन युद्धपोतों में INS दुनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय शामिल हैं। इन जहाजों का जलावतरण ऐसे समय पर हुआ है जब पड़ोसी देश पाकिस्तान ने चीन से हंगोर क्लास की पनडुब्बियां खरीदी हैं और बंगाल की खाड़ी में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

पनडुब्बियों का दुश्मन है INS अग्रय

INS अग्रय इन तीनों में सबसे खास है क्योंकि इसे विशेष रूप से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर यानी पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए तैयार किया गया है। युद्धपोत के कमांडिंग ऑफिसर कमांडर सुनील मलपोत्रा का कहना है कि आकार में छोटा दिखने के बावजूद यह पोत बेहद शक्तिशाली है। इसमें दुश्मन की पनडुब्बियों को समुद्र के उथले क्षेत्रों में भी खोजकर उन्हें नष्ट करने की पूरी क्षमता है।

अत्याधुनिक हथियारों से लैस

INS अग्रय में कई स्वदेशी प्रणालियां लगाई गई हैं, जो इसे तकनीकी रूप से बेहद उन्नत बनाती हैं। इसमें निम्नलिखित मुख्य क्षमताएं मौजूद हैं:

  • स्वदेशी रूप से विकसित सोनार सूट और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम।
  • दुश्मन की पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिए स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर।
  • टॉरपीडो ट्यूब और एक खास डिकॉय सिस्टम।
  • डिकॉय सिस्टम दुश्मन द्वारा दागे गए टॉरपीडो को भटकाने में सक्षम है, जिससे जहाज की सुरक्षा बढ़ जाती है।

समुद्री निगरानी में मिलेगी मजबूती

INS दुनागिरी और INS संशोधक भी भारतीय नौसेना की क्षमता को नई ऊंचाई देंगे। जहां INS दुनागिरी एक एडवांस युद्धपोत के तौर पर नौसेना की युद्धक शक्ति को मजबूत करेगा, वहीं INS संशोधक हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और समुद्री मानचित्रण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नौसेना के अधिकारियों का मानना है कि इन पोतों के बेड़े में शामिल होने से 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिला है और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और अधिक सुरक्षित हुई है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप