7.7% की रफ्तार से भागी भारतीय अर्थव्यवस्था, फिर भी क्यों मंडरा रहे संकट के बादल? समझें पूरे आंकड़े व्यापार 3 महीने पहले 54
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP ग्रोथ 7.7% रही और चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी, लेकिन कच्चे तेल, एल नीनो और वैश्विक तनाव जैसी चुनौतियां आगे विकास दर पर असर डाल सकती हैं।

वैश्विक स्तर पर लगातार गहराती अनिश्चितता, युद्ध और महंगाई के दबाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी ताकत का परिचय दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश की GDP ग्रोथ 7.7% दर्ज की गई, जो बीते साल के 7.1% की तुलना में कहीं बेहतर है। जनवरी-मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8% की गति से आगे बढ़ी, जिसने बाजार और जानकारों दोनों को हैरान कर दिया। हालांकि इस बेहतरीन प्रदर्शन के बीच आने वाले दिनों में कुछ ऐसे जोखिम भी हैं, जो भारत की रफ्तार पर असर डाल सकते हैं।

सरकारी आंकड़ों की मानें तो वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रही, जो विशेषज्ञों के अनुमानों से ऊपर है। इसके साथ ही तीसरी तिमाही की वृद्धि दर को संशोधित करते हुए 8% कर दिया गया है। महंगाई के समायोजन के बाद देश की जीडीपी बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 299.89 लाख करोड़ रुपये थी। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था का दायरा निरंतर फैल रहा है।

नए GDP बेस ईयर का दिखा प्रभाव

भारत अब नई जीडीपी सीरीज के आधार पर अपने आंकड़े सामने रख रहा है। सरकार ने 2022-23 को नया आधार वर्ष तय किया है। इसका उद्देश्य महामारी के बाद बदले उपभोक्ता व्यवहार, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और नई आर्थिक गतिविधियों को आंकड़ों में बेहतर ढंग से शामिल करना है। इस नई व्यवस्था से देश की असल आर्थिक तस्वीर का अधिक सटीक अंदाजा लगाया जा सकेगा।

आगे क्यों गहरा रही हैं आशंकाएं?

मौजूदा आंकड़े भले ही हौसला बढ़ाने वाले हों, लेकिन आगे का रास्ता उतना आसान नजर नहीं आ रहा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल के बढ़ते दाम और वैश्विक व्यापार में बनी अनिश्चितता भारत के सामने बड़ी अड़चन साबित हो सकती है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारी मात्रा में तेल आयात करता है। ऐसे में अगर तेल महंगा हुआ, तो महंगाई में इजाफा हो सकता है और आर्थिक वृद्धि की चाल धीमी पड़ सकती है।

एल नीनो और कमजोर मानसून की चुनौती

मौसम वैज्ञानिकों ने इस वर्ष एल नीनो की आशंका जताई है, जिसके चलते मानसून कमजोर रह सकता है। यदि बारिश सामान्य से कम होती है, तो कृषि उत्पादन पर असर पड़ेगा और खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। इसका सीधा प्रभाव ग्रामीण मांग, किसानों की आमदनी और कई उद्योगों की बिक्री पर भी देखने को मिल सकता है।

RBI ने भी कम किया ग्रोथ अनुमान

गौरतलब है कि बढ़ते वैश्विक जोखिमों को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि युद्ध, महंगे ऊर्जा उत्पाद और वैश्विक आर्थिक सुस्ती आने वाले समय में विकास दर पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप