राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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उत्तर प्रदेश के सियासी मैदान में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी ताल ठोक दी है। उन्होंने अपने पहले उम्मीदवार का नाम भी सामने रख दिया है और यह संकेत दिया है कि अगर भाजपा को हराने वाली ताकतें एकजुट होती हैं तो वे साथ खड़े होने को तैयार हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने एक टीवी शो में दिए गए साक्षात्कार में राज्य की राजनीति को लेकर खुलकर बात की।
ओवैसी की पार्टी से गठबंधन पर रुख
कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी के बीच संभावित तालमेल के सवाल पर इमरान मसूद ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल इस तरह की कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इस गठबंधन पर अभी कोई चर्चा हो रही है, और जब चर्चा ही नहीं है तो वे इस पर कुछ नहीं बता सकते। उनके मुताबिक इस तरह के सभी फैसले पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही लेगा।
शो के दौरान जब उनसे पूछा गया कि ओवैसी कह रहे हैं कि मुसलमान अब दरी नहीं बिछाएगा, तो इस पर उन्होंने कहा कि देश के मौजूदा माहौल में सबसे बड़ी जरूरत नफरत और सांप्रदायिकता को खत्म करने की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जाति और धर्म के आधार पर होने वाले भेदभाव और अन्याय को रोकना आवश्यक है। मसूद ने माना कि मुसलमानों की भागीदारी घट रही है, लेकिन यह भी कहा कि अभी समय है कि सब मिलकर समाज को बांटने वाली राजनीति का सामना करें।
सपा से सीट बंटवारे पर क्या बोले
समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे के सवाल पर इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस भीख मांगने की राजनीति नहीं करती। उन्होंने बताया कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर संगठनात्मक तैयारी कर ली है और 70 प्रतिशत से अधिक बूथों पर अध्यक्ष तथा समितियां नियुक्त की जा चुकी हैं। उनके अनुसार कांग्रेस ने 170 से अधिक ऐसी सीटों की पहचान की है, जहां वह मजबूती से चुनाव लड़ सकती है, हालांकि अंतिम फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा।
जब एंकर ने कहा कि सपा से बातचीत चल रही है और चर्चा है कि कांग्रेस 170 सीटों पर लड़ना चाहती है जबकि सपा उसे अधिकतम 40 से 50 सीटें देने के पक्ष में है, तो मसूद ने इसका खंडन किया। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने 170 सीटों पर लड़ने की बात कही और न ही वे सपा से सीटें मांगने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सामने वाले को भी पता है कि कांग्रेस एक बड़ी और राष्ट्रीय पार्टी है।
क्या ओवैसी भाजपा को पहुंचा रहे फायदा
ओवैसी की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए इमरान मसूद ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों से यह सवाल उठता है कि कहीं विपक्षी वोटों के बंटवारे का लाभ भाजपा को तो नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि जो भी राजनीति भाजपा को फायदा पहुंचाती है, उस पर गंभीरता से सोचा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस हर तरह की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ है।
ओवैसी को नहीं मानते पूरे मुस्लिम समाज का नेता
रैपिड फायर राउंड में इमरान मसूद ने कहा कि वह असदुद्दीन ओवैसी को पूरे मुस्लिम समाज का नेता नहीं मानते। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की मौजूदा स्थिति पर उन्होंने कहा कि जो कुछ हो रहा है वह गलत है, हालांकि इसके लिए कुछ हद तक पार्टी नेतृत्व भी जिम्मेदार है। प्रियंका गांधी और राहुल गांधी में से किसी एक को बड़ा नेता चुनने के सवाल पर उन्होंने दोनों को समान महत्व देने की बात कही।
राहुल गांधी विपक्ष की वैचारिक धुरी
राहुल गांधी की भूमिका पर इमरान मसूद ने कहा कि आज देश की राजनीति को दो विचारधाराओं के बीच टकराव के रूप में देखा जा सकता है। उनके अनुसार एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विचारधारा है, तो दूसरी ओर राहुल गांधी विपक्ष की वैचारिक धुरी के रूप में उभरे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दलों के लिए राहुल गांधी के साथ चलना राजनीतिक रूप से अधिक लाभकारी साबित हो सकता है।
अशोक गहलोत के बयान पर सफाई
अशोक गहलोत के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं तो भाजपा को बैन कर देतीं, इमरान मसूद ने कहा कि गहलोत का यह बयान उस माहौल के संदर्भ में था जिसमें नफरत की राजनीति बढ़ने की बात कही जा रही है। उनके मुताबिक कांग्रेस की विचारधारा हमेशा नफरत की राजनीति के खिलाफ रही है और गहलोत का आशय भी इसी संदर्भ में था।
जब उनसे पूछा गया कि अगर भाजपा को चुनाव में नहीं हरा पाएंगे तो क्या उसे बैन करेंगे, तो मसूद ने कहा कि गहलोत ने ऐसी बात नहीं कही थी। उनका कहना था कि भाजपा जैसी नफरत फैलाने वाली संस्थाओं को बैन कर देना चाहिए।
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