पाकिस्तान में इमरान खान को लेकर मचा सियासी घमासान: जेल में मानसिक संतुलन खो रहे पूर्व पीएम? विश्व 2 घंटे पहले 2
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत और जेल में उनके साथ हो रहे व्यवहार को लेकर उनकी बहन उज्मा खान ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उज्मा का दावा है कि इमरान को समय और तारीख तक का होश नहीं है और सरकार उन्हें अंधेरे में रखकर प्रताड़ित कर रही है।

पाकिस्तान में इमरान खान को लेकर सियासी बवाल

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई नेता इमरान खान को लेकर जारी सियासी हलचल के बीच एक नया और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, गुरुवार और शुक्रवार की मध्य रात्रि को शहबाज शरीफ की सरकार ने जिस तरह से इमरान खान को अदियाला जेल से निकालकर अस्पताल पहुंचाया, उसने कई बड़े सवालों को जन्म दे दिया है। भारी सुरक्षा तामझाम के साथ निकला गाड़ियों का काफिला इस्लामाबाद के शिफा अस्पताल की ओर बढ़ता हुआ दिखा था, और शहर के बड़े हिस्सों में बिजली कटौती करके रास्तों को अंधेरे में डुबो दिया गया था। अस्पताल के बाहर मीडिया कर्मियों और पार्टी समर्थकों का जमावड़ा लगा था, लेकिन अंत में पता चला कि काफिला शिफा अस्पताल नहीं, बल्कि सरकारी पीआईएमएस अस्पताल पहुंच गया था। इस घटनाक्रम ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है।

शिफा के बजाय पीआईएमएस अस्पताल क्यों ले जाया गया?

इस पूरे मामले की जड़ में सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश था, जिसमें कोर्ट ने साफ तौर पर इमरान खान को मेडिकल जांच के लिए शिफा अस्पताल ले जाने को कहा था। सरकार की ओर से डाली गई पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद सरकार पर कोर्ट के निर्देशों का पालन करने का दबाव था। हालांकि, सरकार ने इन निर्देशों की व्याख्या अपने तरीके से की और उन्हें शिफा के स्थान पर पीआईएमएस अस्पताल ले गई। हैरानी की बात यह है कि जिस रास्ते से काफिला गुजरा, वहां की स्ट्रीट लाइटें जानबूझकर बुझा दी गई थीं। जिस अस्पताल में उन्हें ले जाया गया, वहां भी कथित तौर पर बिजली गुल थी और अंधेरे के बीच टॉर्च की रोशनी में उनकी आंखों का परीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में उनकी बहन और पेशे से चिकित्सक डॉक्टर उज्मा खान को भी साथ रखा गया, लेकिन उन्हें भी यह अंधेरे में रखा गया कि आखिर इमरान को किस स्थान पर ले जाया जा रहा है।

इमरान खान की बहन उज्मा खान के सनसनीखेज आरोप

डॉक्टर उज्मा खान ने घटना के बाद मीडिया के सामने आकर सरकार की मंशा पर गहरे सवाल उठाए हैं। उज्मा के अनुसार, उन्हें यह कहकर ले जाया गया था कि पीआईएमएस में केवल आंखों की सामान्य जांच होगी और उसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार शिफा अस्पताल ले जाया जाएगा। हालांकि, जांच प्रक्रिया पूरी होते ही बिना किसी देरी के उन्हें वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। यह पूरा सिलसिला करीब छह घंटे तक चला, जिसे उज्मा ने सरकारी छल करार दिया है। उनका स्पष्ट आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें लगातार गुमराह किया और उन्हें इलाज के नाम पर अंधेरे में बैठाए रखा। उज्मा का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें मीडिया से बात न करने की चेतावनी भी दी थी और सुप्रीम कोर्ट के नाम पर डराया-धमकाया गया था। हालांकि, बाद में अपनी दूसरी बहन नूरीन नियाजी के साथ उन्होंने चुप्पी तोड़ी और इस अमानवीय व्यवहार की कड़ी निंदा की।

मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का दावा

उज्मा खान ने इमरान खान की वर्तमान स्थिति को लेकर जो दावे किए हैं, वे विचलित करने वाले हैं। उन्होंने बताया कि जेल में लंबे समय तक अकेले सेल में बंद रहने के कारण इमरान का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है। उनके चेहरे पर सूजन थी और उनकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी। भावुक होते हुए उज्मा ने बताया कि इमरान खान को मौजूदा समय का बोध तक नहीं है। उनसे जब पूछा गया तो वे यह बताने की स्थिति में नहीं थे कि इस समय अगस्त चल रहा है या फिर जून-जुलाई का महीना है। उज्मा ने रोते हुए आरोप लगाया कि सरकार किसी बहुत बड़ी साजिश के तहत उनके भाई को खत्म करने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि इमरान खान से सरकार इसलिए डरती है क्योंकि पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी आज भी उनके साथ खड़ी है और यही कारण है कि उन्हें ऐसी यातनाएं दी जा रही हैं।

सरकार का पक्ष: सुरक्षा थी प्राथमिकता

इमरान खान की बहन के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने एक अलग ही कहानी सुनाई है। सरकार का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल इमरान खान के इलाज और सुरक्षा के निर्देश दिए थे। शिफा अस्पताल एक भीड़भाड़ वाला इलाका है, जहां उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता था, इसलिए सरकार ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत उन्हें वैकल्पिक अस्पताल में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, इमरान खान के सभी आवश्यक मेडिकल टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए गए और वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। सरकार का दावा है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के किसी भी आदेश का उल्लंघन नहीं किया है, बल्कि कैदी की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए अस्पताल बदला गया।

ख्वाजा आसिफ का दावा: इमरान पूरी तरह फिट हैं

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा संभालते हुए कहा कि इमरान खान की सेहत को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि इमरान खान पूरी तरह से स्वस्थ हैं, नियमित व्यायाम करते हैं और उन्हें सरकार की ओर से हर संभव सुविधा मुहैया कराई जा रही है। उन्होंने उज्मा खान के रोने और भावनात्मक अपील को एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति बताया। ख्वाजा आसिफ ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब इमरान खान सत्ता में थे, तब उन्होंने भी विपक्षी नेताओं के साथ जेल में ऐसा ही व्यवहार किया था और आज वही चीजें उनके सामने आ रही हैं।

पीटीआई का पलटवार और भविष्य की रणनीति

इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने सरकार के सभी दावों को झूठ का पुलिंदा करार दिया है। पार्टी के चेयरमैन गौहर अली खान ने साफ तौर पर कहा कि यह सरकार इमरान खान से डरी हुई है और उन्हें प्रताड़ित करके उनके हौसले को तोड़ना चाहती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इमरान खान एक पठान हैं और वे अपनी विचारधारा के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कोई सस्ता राजनीतिक फायदा नहीं उठाएंगे, बल्कि जेल की कठोर परिस्थितियों का सामना करेंगे। वहीं, खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की इस तरह धज्जियां उड़ाती रही, तो देश में कानून का शासन समाप्त हो जाएगा और इसका परिणाम जनता तय करेगी।

क्या देश से बाहर भेजने की हो रही थी कोशिश?

इस बीच पाकिस्तान के सियासी गलियारों में एक नई चर्चा जोर पकड़ रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की ओर से इमरान खान को इलाज के बहाने देश से बाहर भेजने का एक प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, कहा जा रहा है कि इसमें कुछ ऐसी शर्तें थीं जिन्हें इमरान खान ने ठुकरा दिया है। समर्थकों का मानना है कि पाकिस्तान की सत्ता और सेना के लिए इमरान खान का जेल के अंदर रहना ही सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है, इसीलिए उन्हें बाहर भेजने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि उन्हें राजनीति से दूर किया जा सके। अब पूरी स्थिति इस सवाल पर टिकी है कि शहबाज शरीफ की सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कैसे सुनिश्चित करती है और आने वाले दिनों में यह विवाद क्या मोड़ लेता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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