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2 घंटे पहले
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क्यूबेक में अलगाववादी पार्टी की धमाकेदार जीत
कनाडा की राजनीति में इस समय एक बड़ा राजनीतिक तूफान देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खालिस्तान जैसे अलगाववादी आंदोलनों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष समर्थन देने वाला कनाडा अब खुद अपने ही घर में फंस गया है। स्थिति यह है कि कनाडा की धरती पर ही उसके लिए अलगाववादी चुनौतियां पैदा हो गई हैं। कनाडा के प्रमुख राज्य क्यूबेक के प्रांतीय चुनावों में अलगाववादी विचारधारा रखने वाली पार्टी क्यूबेकोइस (PQ) ने शानदार वापसी करते हुए जीत हासिल की है।
चुनाव नतीजों का गणित और सरकार का स्वरूप
पार्टी क्यूबेकोइस के नेता पोल सेंट-पियरे प्लामोंडोन के नेतृत्व में पार्टी ने चुनावों में प्रभावी प्रदर्शन किया है। हालांकि, पार्टी बहुमत के लिए जरूरी 64 सीटों के आंकड़े को पूरी तरह हासिल करने से थोड़ा चूक गई है, जिसके चलते अब वह अल्पमत की सरकार का गठन करेगी। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 10 वर्षों से अधिक के लंबे अंतराल के बाद यह पार्टी फिर से सत्ता की बागडोर संभालने जा रही है। इस चुनाव में पूर्व की सत्ताधारी पार्टी गठबंधन एवेनिर क्यूबेक (CAQ) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है।
क्यूबेक का अलगाववादी इतिहास और विवाद
क्यूबेक कनाडा का एक ऐसा प्रांत है जो अपनी अनूठी सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है। यह कनाडा का एकमात्र फ्रेंच भाषी प्रांत है, जबकि कनाडा के शेष प्रांत मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषी हैं। यहां के निवासियों में अपनी फ्रेंच भाषा और संस्कृति को लेकर गहरी संवेदनशीलता है। ऐतिहासिक रूप से 1763 में जब ब्रिटेन ने फ्रांस को पराजित कर इस क्षेत्र पर नियंत्रण किया, तब से ही यहां की फ्रेंच भाषी आबादी में अंग्रेजी शासन और व्यवस्था के खिलाफ एक वैचारिक असंतोष पनपा था।
क्यूबेक के लोगों का मानना है कि उनकी आवश्यकताएं और प्राथमिकताएं पूरे कनाडा से बिल्कुल अलग हैं, इसलिए वे अपनी नीतियों और फैसलों के लिए खुद जिम्मेदार होने का अधिकार चाहते हैं। साल 1982 में जब कनाडा का नया संविधान अस्तित्व में आया, तब भी क्यूबेक ने उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। उनका तर्क था कि इस संविधान में क्यूबेक को मिलने वाला विशेष दर्जा पर्याप्त नहीं है।
स्वतंत्रता की दिशा में जनमत संग्रह की तैयारी
पार्टी प्रमुख पोल सेंट-पियरे प्लामोंडोन ने चुनाव अभियान के दौरान ही जनता से वादा किया था कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वे कनाडा से अलग होने के मुद्दे पर जनमत संग्रह कराएंगे। जीत दर्ज करने के बाद अपने संबोधन में भी उन्होंने स्पष्ट किया कि क्यूबेक की संप्रभुता और जनहित के लिए वे काम करना जारी रखेंगे। क्यूबेक के लिए यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि इससे पहले साल 1980 और 1995 में भी वहां अलग देश की मांग को लेकर जनमत संग्रह कराए जा चुके हैं। हालांकि, उन दोनों अवसरों पर अलगाव का प्रस्ताव बहुत ही मामूली अंतर से खारिज हो गया था। अब एक बार फिर से इस मुद्दे के जोर पकड़ने से कनाडा की एकता पर सवाल उठने लगे हैं।
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