खीरे की खेती: एक पौधे से 100 फल पाने का जादुई तरीका, दरभंगा के किसान की कमाई देख हैरान रह जाएंगे आप भारत एक घंटा पहले 5
दरभंगा के प्रगतिशील किसान अखिलेश चौधरी ने हाइब्रिड खीरे की खेती अपनाकर पारंपरिक फसलों को पीछे छोड़ दिया है। सही तकनीक के इस्तेमाल से उन्हें एक पौधे से 100 खीरे तक मिल रहे हैं और वे 3 से 4 महीने तक लगातार मुनाफा कमा रहे हैं।

मिथिला में खीरे की खेती का नया दौर

बिहार के दरभंगा जिले में किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर नकदी फसलों की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। मिथिलांचल के किसान अब धान और गेहूं जैसी पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर व्यावसायिक खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि कम लागत और कम समय में बेहतर मुनाफा कमाया जा सके। इसी बदलाव के चलते खीरे की व्यावसायिक खेती यहाँ के किसानों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरी है। बाजार में खीरे की मांग साल भर बनी रहती है, जिसका सीधा फायदा किसानों की जेब तक पहुँच रहा है।

अखिलेश चौधरी की हाइब्रिड सफलता

दरभंगा के किसान अखिलेश चौधरी ने इस बार अपने खेतों में हाइब्रिड किस्म के खीरे को लगाकर एक उदाहरण पेश किया है। उनका अनुभव अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक है। अखिलेश चौधरी बताते हैं कि यदि सही देखभाल, समय पर सिंचाई और उर्वरकों का सही प्रबंधन किया जाए, तो एक पौधे से करीब 100 खीरे तक प्राप्त किए जा सकते हैं। यह संख्या पारंपरिक किस्मों की तुलना में काफी अधिक है और किसानों के लिए बड़े बदलाव का संकेत है।

लंबे समय तक मुनाफा देने वाली फसल

खीरे की इस हाइब्रिड खेती की सबसे बड़ी खासियत इसका उत्पादन काल है। किसान के अनुसार, एक बार पौधा फल देना शुरू कर दे, तो वह कई सप्ताह तक उत्पादन जारी रखता है। अखिलेश चौधरी ने बताया कि उनके खेत में लगे पौधों से लगभग 3 से 4 महीने तक लगातार खीरे की तुड़ाई की जा सकती है। यह विशेषता किसानों को एक ही बार में फसल बेचने के दबाव से मुक्ति दिलाती है और लंबे समय तक उनकी नियमित आय का जरिया बनी रहती है।

धान-गेहूं से बेहतर आय की उम्मीद

पारंपरिक खेती में जहां एक निश्चित समय के बाद ही आमदनी होती है, वहीं खीरे जैसी सब्जी की खेती से किसान दैनिक या साप्ताहिक आधार पर धन अर्जित कर रहे हैं। अखिलेश चौधरी का स्पष्ट मानना है कि धान और गेहूं के मुकाबले सब्जियों की खेती, विशेष रूप से खीरे की खेती, कहीं अधिक लाभदायक है। बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो फिलहाल बाजार में खीरे का भाव 40 से 50 रुपये प्रति किलो के आसपास चल रहा है। हालांकि, बाजार में सब्जियों की कीमतें मांग और आपूर्ति के आधार पर बदलती रहती हैं, फिर भी एक अच्छी और स्थिर बाजार मांग होने के कारण किसानों को इसमें बड़ा नुकसान होने की संभावना कम रहती है।

कम लागत और कम मेहनत में अधिक लाभ

खेती के विशेषज्ञों का भी मानना है कि खीरे की खेती में शुरुआती निवेश काफी कम होता है। सही तकनीक का चुनाव करने पर किसान बहुत कम मेहनत में भी बंपर उत्पादन ले सकते हैं। केवल पानी की नियमित आपूर्ति, संतुलित खाद और फसल की समुचित निगरानी के माध्यम से उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है। यही कारण है कि मिथिला के किसान अब इसे एक नकदी फसल के तौर पर देख रहे हैं। अखिलेश चौधरी जैसे किसानों का प्रयास यह साबित कर रहा है कि यदि सही दिशा में व्यावसायिक खेती की जाए, तो कृषि को घाटे का नहीं बल्कि फायदे का सौदा बनाया जा सकता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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