भारत
एक दिन पहले
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कर्नाटक के मंगलुरु जिले में सामने आए हनी ट्रैप और जबरन वसूली के एक बड़े मामले में पुलिस ने अहम कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। जिला पुलिस ने इस कथित रैकेट में यूथ कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारी निजाम और उसके साथी जितेश को दबोचा है। आरोप है कि इस गिरोह ने करीब दो साल के दौरान एक नामी व्यापारी से कुल 2.77 करोड़ रुपये ऐंठ लिए।
2024 में व्यापारी को बनाया हनी ट्रैप का शिकार
उर्वा पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के मुताबिक, जितेश ने वर्ष 2024 में व्यापारी को हनी ट्रैप में फंसाया और इसके बाद अश्लील तस्वीरों तथा वीडियो के सहारे उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। आरोप है कि उसने पीड़ित के परिवार के सामने इन तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी दी और शुरुआत में 35 लाख रुपये की मांग रखी।
मदद मांगने पर खुद ही जाल में फंसा व्यापारी
पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि परेशान व्यापारी ने इस मुसीबत से उबरने के लिए यूथ कांग्रेस पदाधिकारी निजाम से मदद मांगी थी। लेकिन जांचकर्ताओं का कहना है कि निजाम ने मदद करने के बजाय खुद जितेश के साथ मिलकर वसूली के इस खेल में हाथ मिला लिया।
गढ़ी गई आत्महत्या की झूठी कहानी
आरोपियों ने कथित तौर पर एक मनगढ़ंत कहानी रची, जिसके मुताबिक मई 2024 में जितेश ने आत्महत्या कर ली थी। व्यापारी को जितेश के नाम का एक सुसाइड नोट तथा उसकी मौत और अंतिम संस्कार से जुड़ी तस्वीरें दिखाई गईं। इन्हीं का सहारा लेकर आरोपियों ने उसे डराया कि अगर उसने मोटी रकम नहीं चुकाई तो उसे किसी आपराधिक मामले में फंसाकर जेल भिजवा दिया जाएगा।
दो साल में पहुंची रकम 2.77 करोड़ तक
बदनामी और कानूनी शिकंजे के डर से व्यापारी 2024 से 2026 के बीच लगातार आरोपियों को रुपये देता रहा और यह राशि बढ़ते-बढ़ते 2.77 करोड़ रुपये तक जा पहुंची। पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश जून 2026 में तब हुआ, जब व्यापारी ने जितेश को मंगलुरु में जिंदा देख लिया, जबकि उसे अब तक यही यकीन दिलाया गया था कि उसकी मौत हो चुकी है।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने निजाम और जितेश दोनों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में आगे की जांच जारी है।
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