हरियाणा
5 घंटे पहले
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विचारों
हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद और चर्चा का दौर शुरू हो गया है। इस बार चर्चा का केंद्र बिंदु भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के सांसद चौधरी धर्मबीर के बेटे मोहित चौधरी का एक बड़ा बयान है। मोहित चौधरी ने खुद इस बात का खुलासा किया है कि वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित हुए Gen-Z आंदोलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए थे। सत्ताधारी पार्टी के एक सांसद के बेटे द्वारा सरकार विरोधी सुर वाले इस बड़े छात्र आंदोलन का हिस्सा बनने की बात स्वीकार करने के बाद कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
हांसी पहुंचे मोहित चौधरी ने पत्रकारों के सामने दी सफाई
मोहित चौधरी, जो धर्मसेना युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं, बुधवार को हरियाणा के हांसी पहुंचे थे। वहां पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनने की बात को खुले तौर पर स्वीकार किया। जब उनसे इस फैसले के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि अगर देश में कोई भी बात या कोई भी व्यवस्था देशहित में नहीं है, या फिर कुछ गलत हो रहा है, तो यह हमारा कर्तव्य है कि हम देश के युवाओं के बीच जाएं, उनके साथ मिलकर उनकी समस्याओं को समझें और उनकी आवाज को सुनें।
नीट पेपर लीक को बताया गलत, सरकार के कदम का किया समर्थन
अपने रुख को स्पष्ट करने के लिए मोहित चौधरी ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में पेपर लीक होना पूरी तरह से गलत था और ऐसा कभी भी नहीं होना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने अपनी ही सरकार का बचाव करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत कड़ा संज्ञान लिया था। सरकार ने तत्परता दिखाते हुए परीक्षा को रद्द करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया और इस पूरे मामले के पीछे जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की।
हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर अलग राय
पत्रकारों ने बातचीत के दौरान मोहित चौधरी से भाजपा की हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के उस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी, जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर के आंदोलन में विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के शामिल होने का आरोप लगाया था। इस पर मोहित चौधरी ने कहा कि वहां प्रदर्शन में असली और पीड़ित बच्चे भी मौजूद थे जो अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज उठा रहे थे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ ऐसे शरारती तत्व भी वहां थे जिनका मुख्य उद्देश्य केवल सरकार को बदनाम करना था, ताकि वे जिस भी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं, उन्हें उसका सीधा राजनीतिक फायदा मिल सके और वे वाहवाही लूट सकें।
डॉ. अर्चना गुप्ता के पुराने दावों पर उठे सवाल
गौरतलब है कि लगभग एक महीना पहले हांसी में ही हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने जंतर-मंतर पर हुए इस छात्र आंदोलन को लेकर बेहद चौंकाने वाले और गंभीर दावे किए थे। उन्होंने अपने बयान में आरोप लगाया था कि जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान भारी अराजकता फैलाई गई थी और वहां कुछ आतंकवादी तत्व भी सक्रिय रूप से दिखाई दिए थे। डॉ. अर्चना गुप्ता ने यह भी दावा किया था कि इस हिंसक आंदोलन के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत हो गई थी और एक अन्य पुलिस अधिकारी की आंख चली गई थी।
दिल्ली पुलिस और विदेश मंत्रालय ने दावों को किया था खारिज
हालांकि, बाद में सरकारी विभागों और सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से आए बयानों ने डॉ. अर्चना गुप्ता के दावों को खारिज कर दिया था। दिल्ली पुलिस ने 24 जुलाई को ही आधिकारिक तौर पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी महिला पुलिसकर्मी या महिला कॉन्स्टेबल की मौत होने की खबर पूरी तरह से झूठी और गलत है। इसके साथ ही, इस आंदोलन में विदेशों से वित्तीय मदद मिलने के दावों पर विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया था कि उसके पास ऐसे किसी भी विदेशी फंडिंग या विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े रिकॉर्ड की कोई जानकारी मौजूद नहीं है।
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