जीवनशैली
2 घंटे पहले
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विचारों
आज के आधुनिक समय में हमारी दिनचर्या पूरी तरह बदल चुकी है। इस बदलती जीवनशैली, अत्यधिक मानसिक तनाव और शरीर में होने वाले हार्मोनल असंतुलन के कारण सेहत से जुड़ी कई परेशानियां सामने आ रही हैं, जिनमें से एक बड़ी समस्या थायरॉइड की है। हमारे शरीर में थायरॉइड ग्रंथि का बहुत महत्व है क्योंकि यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा के स्तर और विभिन्न प्रकार के हार्मोन के संतुलन को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाती है। जब इस ग्रंथि के कामकाज में रुकावट आती है, तो शरीर के कई हिस्से प्रभावित होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों की सलाह और जरूरी दवाओं के सेवन के साथ, अगर योग और प्राणायाम को भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना लिया जाए, तो इससे बहुत राहत मिल सकती है।
महादेवन योग स्टूडियो की जानी-मानी योग शिक्षिका पूजा का कहना है कि नियमित रूप से योगाभ्यास करने से न केवल शरीर को आराम मिलता है बल्कि मानसिक तनाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने थायरॉइड की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए शरीर और सांसों में संतुलन स्थापित करने वाले 5 बहुत ही आसान और बेहद असरदार योगासनों और प्राणायाम के बारे में बताया है, जिन्हें कोई भी आसानी से घर पर कर सकता है।
1. ब्रिज पोज से करें अपने योगाभ्यास की शुरुआत
योग शिक्षिका पूजा के अनुसार, थायरॉइड की समस्या में राहत पाने के लिए सबसे पहले ब्रिज पोज का अभ्यास करना चाहिए। इसे करने के लिए सबसे पहले अपनी योग मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। इसके बाद अपने दोनों घुटनों को मोड़ लें और पैरों के तलवों को जमीन पर मजबूती से टिकाकर रखें। अब अपने दोनों हाथों को नीचे की ओर ले जाते हुए पैरों की एड़ियों को पकड़ने की कोशिश करें। इसके बाद, अपनी सांसों की गति को सामान्य रखते हुए धीरे-धीरे अपने कूल्हों और अपनी छाती के हिस्से को ऊपर की तरफ उठाएं। जब आप इस मुद्रा में आते हैं, तो आपको अपनी गर्दन और गले के आसपास के हिस्से में एक हल्का और सुखद खिंचाव महसूस होने लगेगा। इस स्थिति में रहते हुए अपनी सांसों के आने और जाने पर पूरा ध्यान केंद्रित करें। इस खिंचाव को महसूस करते हुए आपको लगभग 10 से 20 सेकंड तक इसी मुद्रा में स्थिर रहने का प्रयास करना चाहिए।
2. हलासन के नियमित अभ्यास से शरीर को मिलेगा आराम
ब्रिज पोज का अभ्यास पूरा करने के बाद अगला चरण हलासन का आता है। हलासन करने के लिए आपको बहुत ही सावधानी से अपने दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाना है और फिर उन्हें धीरे-धीरे अपने सिर के पीछे की तरफ ले जाना है। कोशिश करें कि आपके पैरों के पंजे सिर के पीछे जमीन को छू सकें। हालांकि, इस आसन को करते समय बिल्कुल भी जल्दबाजी न दिखाएं और न ही शरीर पर कोई अतिरिक्त दबाव डालें। आप अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही इस मुद्रा में रुकने का प्रयास करें। योग शिक्षिका पूजा के मुताबिक, इस आसन की अंतिम मुद्रा में पहुंचने के बाद करीब 20 से 30 सेकंड तक रुककर इसका अभ्यास किया जा सकता है। यह आसन गले के हिस्से पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
3. ऊंटासन (कैमल पोज) से गले और छाती की मांसपेशियों में आएगा खिंचाव
इसके बाद अगला योगासन है ऊंटासन, जिसे अंग्रेजी में कैमल पोज भी कहा जाता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले घुटनों के बल खड़े हो जाएं। इस बात का ध्यान रखें कि आपके दोनों घुटनों के बीच थोड़ा सा अंतर होना चाहिए। इसके बाद, धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाएं और अपनी एड़ियों को पकड़ने का प्रयास करें। अब अपनी छाती को ऊपर की ओर उठाते हुए अपने पूरे शरीर को पीछे की दिशा में झुकाएं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अपनी सांस लेने की गति को बिल्कुल सामान्य रखें और बिना किसी घबराहट के इस मुद्रा में बने रहें। इस मुद्रा में करीब 20 से 30 सेकंड तक रहने का लगातार अभ्यास करें, जिससे आपके गले और छाती की मांसपेशियों में अच्छा खिंचाव आएगा।
4. मत्स्यासन के जरिए सांसों पर केंद्रित करें अपना ध्यान
मत्स्यासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले अपनी योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने पूरे शरीर को पूरी तरह से ढीला छोड़कर आराम की स्थिति में ले आएं। इसके बाद, अपनी छाती के हिस्से को ऊपर की तरफ उठाएं और अपने सिर के सबसे ऊपरी हिस्से यानी क्राउन एरिया को मैट से सटाने या टिकाने की कोशिश करें। इस मुद्रा को करते समय आप अपने दोनों हाथों को या तो अपने शरीर के पास रख सकते हैं या फिर उन्हें ऊपर की ओर उठा सकते हैं। योग एक्सपर्ट द्वारा इस मुद्रा में भी लगभग 20 से 30 सेकंड तक रुकने की सलाह दी जाती है। यह आसन श्वसन तंत्र को बेहतर बनाने के साथ-साथ मानसिक शांति प्रदान करने में भी सहायक होता है।
5. अंत में करें उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास
इन चारों महत्वपूर्ण आसनों को पूरा करने के बाद, कुछ समय के लिए शरीर को पूरी तरह शांत और शिथिल छोड़ दें। इसके बाद थायरॉइड के लिए सबसे कारगर माना जाने वाला उज्जायी प्राणायाम शुरू करें। इस प्राणायाम को करने के लिए अपना मुंह पूरी तरह से बंद रखें और केवल अपनी नाक के जरिए ही सांस को अंदर लें और बाहर छोड़ें। जब आप सांस अंदर लेते और बाहर छोड़ते हैं, तो अपने गले की मांसपेशियों को थोड़ा सिकोड़ें ताकि गले से एक बहुत ही धीमी और हल्की 'ह' जैसी आवाज उत्पन्न हो सके। इस पूरे अभ्यास के दौरान आपका पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ अपनी सांसों के आने-जाने और उस आवाज पर ही केंद्रित होना चाहिए। योग विशेषज्ञ पूजा का मानना है कि इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास न केवल मानसिक तनाव को काफी हद तक कम करता है, बल्कि सांसों को नियंत्रित करने और थायरॉइड ग्रंधि को संतुलित रखने में भी बेहद मददगार साबित होता है।
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