फर्जी दस्तावेजों से MBBS में प्रवेश लेने वाली 4 छात्राओं पर मुकदमा, एडमिशन हुआ निरस्त भारत एक घंटा पहले 6
उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे का गलत लाभ उठाकर मेडिकल कॉलेजों में सीट हथियाने वाली 4 छात्राओं का दाखिला रद्द कर दिया गया है, साथ ही पुलिस ने मामले में FIR भी दर्ज की है।

फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के जरिए मेडिकल कॉलेज में सीट पाने की चाह रखने वाली 4 छात्राओं को भारी पड़ गई है। इन छात्राओं ने कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्रों का सहारा लेकर MBBS पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था। जैसे ही इस मामले का खुलासा हुआ, प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन चारों छात्राओं के प्रवेश को निरस्त कर दिया है। इस मामले में कुल 5 लोगों के खिलाफ संबंधित थानों में कानूनी मुकदमा दर्ज किया गया है।

जांच समिति की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

यह पूरा मामला तब सामने आया जब इन प्रमाणपत्रों के असली होने पर सवाल उठे। देहरादून के जिलाधिकारी ने इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच करने के लिए एक विशेष संयुक्त समिति का गठन किया। इस समिति में मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी शामिल थे। गहन जांच के दौरान पाया गया कि जिन प्रमाणपत्रों के आधार पर कोटा हासिल किया गया था, वे प्रथम दृष्टया संदिग्ध थे। इतना ही नहीं, प्रमाणपत्रों में दर्ज पतों का भौतिक सत्यापन करने पर भी वे पूरी तरह गलत साबित हुए, जिससे जालसाजी की पुष्टि हुई।

दो अलग-अलग थानों में दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग थानों में FIR दर्ज की है। क्लेमेंट टाउन थाने में त्रिप्ति और उसकी मां उमा देवी के खिलाफ स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र से जुड़े फर्जीवाड़े में मामला दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी ओर, रायपुर थाने में खुशी, परी और स्वाति के नाम से अलग मुकदमा दर्ज किया गया है। ये छात्राएं प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया में शामिल थीं।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई

देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती जांच में न केवल प्रमाणपत्र संदिग्ध मिले, बल्कि आवेदन के समय प्रस्तुत किए गए दस्तावेज भी अधूरे पाए गए। जिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा निदेशक के पास भेज दी है। इसके बाद एचएनबी मेडिकल एजुकेशन यूनिवर्सिटी ने त्वरित कदम उठाते हुए इन चारों छात्राओं का MBBS प्रवेश रद्द कर दिया है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने पुष्टि की है कि जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट ही इस निरस्तीकरण का मुख्य आधार है।

मध्य प्रदेश में भी हुआ था ऐसा ही बड़ा खुलासा

फर्जी MBBS डिग्रियों के जरिए स्वास्थ्य व्यवस्था में सेंध लगाने का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। कुछ समय पहले मध्य प्रदेश में भी फर्जी डिग्रियों के सहारे सरकारी नौकरी पाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ था। उस दौरान पुलिस ने 3 फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया था। यह फर्जीवाड़ा नेशनल हेल्थ मिशन के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिकों में चल रहा था, जहां ये आरोपी फर्जी डिग्रियों और नकली मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन नंबर का उपयोग कर मरीजों का इलाज कर रहे थे।

गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान डॉ. सचिन यादव, डॉ. राजपाल गौर और अजय मौर्य के रूप में हुई थी। जांच में पता चला कि दमोह के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात इन लोगों के पास असली MBBS की डिग्री ही नहीं थी। वास्तव में सचिन यादव BDS, राजपाल गौर BHMS और अजय मौर्य BSc पास थे। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने करीब पांच लाख रुपये खर्च करके फर्जी MBBS डिग्रियां तैयार करवाई थीं और उन्हीं के दम पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में नौकरी हासिल की थी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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