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एक घंटा पहले
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शरीर के सबसे अहम अंगों में शुमार लिवर भोजन को ऊर्जा में बदलने, विषैले तत्वों को बाहर निकालने और कई जरूरी प्रोटीन बनाने जैसे काम करता है। यही वजह है कि इसकी सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लिवर की मौजूदा स्थिति को समझने में एएलटी टेस्ट अहम भूमिका निभाता है।
क्या होता है एएलटी टेस्ट
एएलटी यानी एलानिन एमिनोट्रांसफरेज (Alanine Aminotransferase) एक एंजाइम है, जिसे एसजीपीटी (SGPT) के नाम से भी पहचाना जाता है। यह मुख्य रूप से लिवर की कोशिकाओं में मौजूद रहता है। जब लिवर पर किसी तरह का दबाव पड़ता है, सूजन आती है या उसे नुकसान पहुंचता है, तो खून में इस एंजाइम की मात्रा बढ़ने लगती है। इसी कारण एएलटी टेस्ट को लिवर की कार्यक्षमता का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
एएलटी लेवल जांचना क्यों है जरूरी
अक्सर लिवर से जुड़ी दिक्कतें शुरुआती दौर में कोई साफ लक्षण नहीं दिखातीं। ऐसी स्थिति में एएलटी का बढ़ा हुआ स्तर वक्त रहते आगाह कर देता है कि लिवर पर असर पड़ रहा है। आम तौर पर इसका स्तर 7 से 56 यूनिट प्रति लीटर (U/L) के बीच माना जाता है, हालांकि अलग-अलग लैब में यह सीमा थोड़ी अलग हो सकती है।
किन लोगों को रहना चाहिए ज्यादा सतर्क
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापा, डायबिटीज, बहुत अधिक शराब का सेवन, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी लिवर पर बुरा असर डाल सकती है। ऐसे लोगों को समय-समय पर एएलटी टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है, ताकि किसी भी गड़बड़ी का जल्द पता लगाया जा सके।
लिवर की गड़बड़ी के शुरुआती संकेत
लिवर से जुड़ी कई बीमारियां लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के बनी रह सकती हैं। लेकिन जब हालत बिगड़ने लगती है, तो शरीर कुछ संकेत देने लगता है। इनमें ये बातें शामिल हो सकती हैं—
- लगातार थकान महसूस होना
- भूख कम लगना
- पेट में भारीपन
- त्वचा या आंखों का पीला पड़ना
- वजन में बदलाव
इसीलिए सिर्फ लक्षणों का इंतजार करना सही नहीं माना जाता।
एक साधारण ब्लड टेस्ट देता है अहम जानकारी
एएलटी टेस्ट एक सामान्य रक्त जांच है, जो आसानी से उपलब्ध और अपेक्षाकृत किफायती होती है। इसके जरिए लिवर की स्थिति का शुरुआती आकलन किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर आगे की जांच तथा इलाज समय रहते शुरू किया जा सकता है।
लिवर को स्वस्थ रखने के आसान उपाय
- संतुलित और पौष्टिक आहार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
- नियमित रूप से व्यायाम या किसी न किसी शारीरिक गतिविधि में हिस्सा लें।
- शराब और बहुत ज्यादा वसायुक्त भोजन का सेवन सीमित रखें।
- अपने वजन को नियंत्रण में बनाए रखें।
- समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं और जरूरत पड़ने पर एएलटी टेस्ट जरूर करवाएं।
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