मधुमक्खी के एक डंक के बाद क्यों पूरा झुंड बन जाता है हमलावर? जानिए इसके पीछे का चौंकाने वाला विज्ञान जीवनशैली 2 महीने पहले 91
क्या आप जानते हैं कि मधुमक्खियां बेवजह इंसानों पर हमला नहीं करतीं और एक डंक के बाद क्यों उनका पूरा परिवार आक्रामक हो जाता है? आइए समझते हैं इस प्रक्रिया के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य।

मधुमक्खियां आखिर क्यों करती हैं हमला

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या मधुमक्खियां बिना किसी कारण के लोगों को निशाना बनाती हैं। सच तो यह है कि मधुमक्खियां तब तक किसी सजीव पर हमला नहीं करतीं जब तक उन्हें स्वयं के लिए कोई बड़ा खतरा महसूस न हो। पश्चिमी चंपारण के माधोपुर स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ. नीरज कुमार के अनुसार, जब मधुमक्खियों को लगता है कि कोई उनके छत्ते या उनके जीवन के लिए खतरा पैदा कर रहा है, तो वे अपने बचाव में डंक का इस्तेमाल करती हैं।

डंक में छिपा है दर्द का असली कारण

जब एक मधुमक्खी अपना डंक किसी के शरीर में धंसाती है, तो वह एक विशेष प्रकार का रसायन छोड़ती है जिसे मेथेनोइक अम्ल या फॉर्मिक एसिड कहा जाता है। इसके साथ ही उनके डंक में मेलिटिन नामक प्रोटीन, हिस्टामाइन और कई तरह के एंजाइम भी मौजूद होते हैं। इन्हीं रसायनों के शरीर में प्रवेश करते ही प्रभावित स्थान पर तेज जलन और असहनीय दर्द महसूस होने लगता है।

डंक मारना यानी अपनी मौत को बुलावा

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मधुमक्खी के लिए डंक मारना एक आत्मघाती कदम होता है। वैज्ञानिक बताते हैं कि मधुमक्खी का डंक पीछे की ओर मुड़ा हुआ होता है, जो किसी के मांस में धंसने के बाद बाहर नहीं निकल पाता। डंक को वापस खींचने की कोशिश में मधुमक्खी का वह अंग उसके शरीर से अलग होकर वहीं फंस जाता है। चूंकि डंक के साथ मधुमक्खी के शरीर के महत्वपूर्ण आंतरिक अंग भी जुड़े होते हैं, इसलिए डंक टूटते ही मधुमक्खी की तत्काल मृत्यु हो जाती है।

पूरा झुंड क्यों टूट पड़ता है

अक्सर देखा गया है कि एक मधुमक्खी के डंक मारते ही बाकी की मधुमक्खियां भी आक्रामक हो जाती हैं। इसके पीछे का कारण एक खास रासायनिक संकेत है। डॉ. नीरज कुमार बताते हैं कि जब एक मधुमक्खी डंक मारती है, तो वह डंक के साथ एक विशिष्ट गंध छोड़ती है जिसे अलर्ट फेरोमोन कहते हैं। यह गंध हवा में फैलते ही पूरे झुंड को सक्रिय कर देती है। इस संकेत को मिलते ही छत्ते की सभी श्रमिक मधुमक्खियां अलर्ट मोड पर आ जाती हैं और दुश्मन को पहचानकर उस पर सामूहिक रूप से हमला कर देती हैं।

श्रमिक मधुमक्खियों की भूमिका

यह प्रक्रिया मुख्य रूप से श्रमिक मधुमक्खियों द्वारा संचालित होती है। जब भी किसी पर हमला होता है, तो छत्ते की अन्य मधुमक्खियां उसी दिशा में दौड़ पड़ती हैं जहाँ से उन्हें खतरे का संकेत मिला होता है। यह एक प्रकार की सुरक्षा प्रणाली है जो वे अपने छत्ते की रक्षा के लिए सदियों से अपनाती आ रही हैं। अतः अगली बार यदि कहीं मधुमक्खियों का छत्ता दिखे, तो उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखना ही सबसे समझदारी भरा कदम है, क्योंकि उनका एक हमला उनके लिए जीवन का अंत और आपके लिए गंभीर मुसीबत साबित हो सकता है।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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