जीवनशैली
3 घंटे पहले
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विचारों
मानसून में खांसी के खतरे
बदलते मौसम और मानसून के दौरान अक्सर लोग खांसी और जुकाम को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं। फरीदाबाद के चिकित्सक डॉ. अर्जुन खन्ना का कहना है कि लगातार बनी रहने वाली खांसी एलर्जी, दमा, टीबी या फिर फेफड़ों से जुड़ी किसी बड़ी समस्या का लक्षण हो सकती है। यह जरूरी है कि हम समझें कि सामान्य खांसी और गंभीर बीमारी में क्या अंतर है।
कब चिंता करना है जरूरी
डॉ. खन्ना के अनुसार, यदि खांसी सामान्य जुकाम या गले में खराश के कारण है, तो यह आमतौर पर चार से पांच दिन में खुद ही ठीक हो जाती है। हालांकि, स्थिति तब गंभीर होती है जब खांसी लंबे समय तक बनी रहे या सीने में जकड़न व सीटी जैसी आवाज सुनाई दे। बच्चों में खांसी के पीछे मुख्य कारण अक्सर कोई संक्रमण होता है। वहीं, वयस्कों में इसके पीछे टीबी, फेफड़ों का कैंसर, फेफड़ों में सिकुड़न या ILD जैसी गंभीर बीमारियां छिपी हो सकती हैं।
सावधानी और उपचार
विशेषज्ञों का मानना है कि हर प्रकार की खांसी में एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना सही नहीं है। बेवजह दवाओं का उपयोग शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए सही समय पर डॉक्टर से सलाह लें और आवश्यक जांच कराएं ताकि किसी भी बड़ी बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके।
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