मटर के दाने जितना नन्हा पौधा, फायदे बड़े-बड़े! मकोय के औषधीय गुण जान चौंक जाएंगे आप जीवनशैली एक घंटा पहले 2
ग्रामीण इलाकों में आसानी से उगने वाला मकोय आयुर्वेद में बेहद उपयोगी माना जाता है। जानकारों के मुताबिक इसके पत्ते, फल और जड़ लीवर, पाचन और त्वचा से जुड़ी दिक्कतों में सहायक हैं, पर इसका औषधीय सेवन चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।

प्रकृति ने हमें कई ऐसे पौधे सौंपे हैं जो सेहत के लिहाज से किसी नियामत से कम नहीं हैं। इन्हीं में एक नाम मकोय का भी है। आकार में यह बेहद छोटा पौधा है, लेकिन इसके गुण और फायदे बड़े-बड़े बताए जाते हैं। आयुर्वेद में लंबे अरसे से इसका इस्तेमाल अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं में होता आया है। गांव-देहात में यह पौधा खेतों, बगीचों और खाली पड़ी जमीन पर अपने आप उग आता है।

क्या है मकोय और कैसा दिखता है यह पौधा

गोंडा के वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति बताते हैं कि मकोय का वैज्ञानिक नाम सोलनम नाइग्रम (Solanum nigrum) है। कई इलाकों में इसे काला मकोय या मकौय के नाम से भी पुकारा जाता है। इस पौधे पर छोटे-छोटे हरे रंग के फल आते हैं, जो पककर काले पड़ जाते हैं। इसके पत्ते, फल और जड़—तीनों ही औषधीय दृष्टि से उपयोगी माने जाते हैं।

शरीर को ठंडक देने वाला पौधा

वैद्य प्रजापति के अनुसार मकोय में कई तरह के पोषक तत्व और औषधीय गुण मौजूद रहते हैं। इसे शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला पौधा माना गया है। यही वजह है कि कुछ जगहों पर गर्मी के मौसम में इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इसका प्रयोग शरीर की गर्मी घटाने और सामान्य सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए किया जाता है।

लीवर और पाचन के लिए सहायक

मकोय को लीवर के लिए लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद में इसका उपयोग लीवर को स्वस्थ रखने और उससे जुड़ी परेशानियों में मददगार औषधि के तौर पर किया जाता है। यह पाचन तंत्र के लिए भी उपयोगी है। कुछ लोग इसके पत्तों का साग बनाकर भी खाते हैं, जिससे शरीर को पोषण मिलता है।

त्वचा की दिक्कतों में राहत

वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति बताते हैं कि त्वचा से जुड़ी समस्याओं में भी मकोय काम आता है। ग्रामीण इलाकों में लोग इसकी पत्तियों का लेप त्वचा पर लगाते हैं। माना जाता है कि इससे त्वचा को आराम मिलता है।

सूजन और दर्द में इस्तेमाल

मकोय में सूजनरोधी गुण भी बताए जाते हैं। इसका उपयोग शरीर की सूजन, यूट्रस में सूजन और सामान्य दर्द से राहत पाने के लिए किया जाता है। साथ ही यह बुखार और कमजोरी को दूर भगाने में भी सहायक माना जाता है। कई लोग इसके पके हुए फल खाते हैं। हालांकि कच्चे फल या पौधे के दूसरे हिस्सों का इस्तेमाल बिना सही जानकारी के नहीं करना चाहिए, क्योंकि गलत तरीके से सेवन करने पर सेहत से जुड़ी दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।

सलाह के बिना न करें औषधीय उपयोग

मकोय छोटे आकार का होने के बावजूद कई गुणों से भरपूर माना जाता है। वैद्य प्रजापति का कहना है कि इसे किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति इसका औषधीय उपयोग करना चाहता है तो उसे पहले आयुर्वेद चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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