कैंसर से बचना है तो रसोई की इन जड़ी-बूटियों को डाइट में करें शामिल, विशेषज्ञ ने दी सलाह जीवनशैली एक घंटा पहले 4
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए केवल एक चीज पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जीवनशैली में बदलाव करना जरूरी है। विशेषज्ञ ने रसोई में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास मसालों और जड़ी-बूटियों के फायदों के बारे में जानकारी दी है।

कैंसर से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार

आज के समय में कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। लोग इससे बचने के लिए कई तरह के उपाय अपनाते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल किसी एक चीज के सेवन से कैंसर को नहीं रोका जा सकता है। इसके लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है जिसमें संतुलित आहार, नियमित शारीरिक व्यायाम, भरपूर नींद और धूम्रपान या शराब जैसी बुरी आदतों से दूरी बनाना शामिल है।

रसोई में छिपे हैं स्वास्थ्य के कई राज

ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार के अनुसार, हमारी रसोई में मौजूद कई मसाले और जड़ी-बूटियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। इनका सही तरीके से उपयोग स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और बीमारियों से लड़ने में मदद कर सकता है। उन्होंने कैंसर से बचाव में मददगार कुछ प्रमुख तत्वों का उल्लेख किया है:

  • हल्दी: इसमें करक्यूमिन नामक एक शक्तिशाली यौगिक पाया जाता है। शोध बताते हैं कि करक्यूमिन में कैंसर सहित कई अन्य बीमारियों से लड़ने के गुण मौजूद होते हैं।
  • अंबा हल्दी: यह भी स्वास्थ्य के लिए काफी गुणकारी मानी जाती है।
  • अदरक: इसका उपयोग भारतीय घरों में चाय से लेकर सब्जियों और काढ़े तक में किया जाता है, जो इसे एक महत्वपूर्ण औषधीय घटक बनाता है।
  • लहसुन: रसोई का यह मुख्य मसाला अपने एंटी-बैक्टीरियल गुणों के लिए जाना जाता है।
  • नीम: यह शरीर को शुद्ध करने और रोगों से लड़ने में सहायक है।
  • तुलसी: इसे आयुर्वेद में औषधि के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।
  • दालचीनी: यह न केवल स्वाद बढ़ाती है, बल्कि कई तरह के संक्रमणों से बचाने में भी कारगर है।

विशेषज्ञों की राय

डॉक्टर राजकुमार का मानना है कि इन जड़ी-बूटियों को नियमित आहार में शामिल करना एक अच्छा विकल्प है। लेकिन, इन्हें केवल एक पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए। कैंसर जैसी किसी भी समस्या के लिए हमेशा चिकित्सकीय परामर्श को प्राथमिकता देनी चाहिए और अपनी जीवनशैली के अन्य पहलुओं जैसे व्यायाम और पर्याप्त नींद के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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