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2 घंटे पहले
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सेहत के लिए वरदान है वीटग्रास
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ते प्रदूषण और मानसिक तनाव के कारण लोग खान-पान की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। आज के समय में शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, पाचन तंत्र की गड़बड़ी और जोड़ों का दर्द आम समस्या बन चुका है। इन बीमारियों से लड़ने के लिए दवाओं पर निर्भर होने के बजाय प्रकृति की ओर लौटना एक बेहतर विकल्प है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गेहूं के ज्वारे, जिसे आम भाषा में वीटग्रास कहा जाता है, स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।
हरा खून के नाम से क्यों है मशहूर
प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर डॉ. एम. ए. आरिफ खान के अनुसार, वीटग्रास को 'हरा खून' यानी ग्रीन ब्लड की उपमा दी गई है। इसके पीछे का मुख्य कारण इसमें मौजूद पोषक तत्वों की प्रचुरता है। इसमें भरपूर मात्रा में क्लोरोफिल, आयरन, मैग्नीशियम और आवश्यक विटामिन्स पाए जाते हैं। यह विशेष रूप से महिलाओं में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने और बुजुर्गों की हड्डियों व पाचन शक्ति को मजबूती देने में रामबाण की तरह काम करता है। यह शरीर के हीमोग्लोबिन स्तर को सुधारने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में बेहद मददगार है।
घर पर उगाने की आसान प्रक्रिया
गेहूं के ज्वारे को अपने घर की छोटी सी जगह में बहुत ही कम लागत में उगाया जा सकता है। इसे उगाने के लिए ये स्टेप्स अपनाएं:
- एक प्लास्टिक की ट्रे लें और उसमें वर्मीकम्पोस्ट, कोकोपीट और मिट्टी की एक पतली परत बिछाएं।
- लगभग 200 ग्राम गेहूं को रातभर पानी में भिगोकर रखें।
- अगले दिन इन भीगे हुए गेहूं के दानों को ट्रे में अच्छी तरह फैला दें।
- रोजाना इन पर हल्का पानी छिड़कते रहें।
- लगभग सात दिनों के भीतर ये पौधे करीब 10 सेंटीमीटर तक लंबे हो जाते हैं।
- सात से बारह दिनों के बीच की पत्तियां कटाई के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं क्योंकि इस दौरान इनमें पोषक तत्वों की मात्रा सबसे अधिक होती है।
सेवन का सही तरीका और सावधानियां
वीटग्रास का लाभ लेने के लिए इसका सेवन सही ढंग से करना जरूरी है। ताजी कटी हुई पत्तियों को थोड़े से पानी के साथ पीसकर छान लें। रोजाना सुबह खाली पेट करीब 30 मिलीलीटर ताजा जूस घूंट-घूंट करके पिएं। ध्यान रखें कि जूस पीने के बाद कम से कम 20 मिनट तक चाय, कॉफी या नाश्ता न करें। जूस को स्टोर करने के बजाय हमेशा ताजा निकालकर पीना ही स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक फायदेमंद होता है।
वेस्ट नहीं होता कुछ भी
वीटग्रास की एक बड़ी खासियत यह है कि इसका कोई भी हिस्सा बेकार नहीं जाता। पत्तियां काट लेने के बाद निचला हिस्सा दुधारू पशुओं को खिलाया जा सकता है, जिससे न केवल उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है, बल्कि दूध की गुणवत्ता में भी सुधार आता है। बची हुई जड़ों और मिट्टी का इस्तेमाल करके बेहतरीन जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इसके अलावा, रस निकालने के बाद बचा हुआ गूदा एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जिसे मसूड़ों की सफाई या शरीर पर लगी हल्की चोटों पर लगाने के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।
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