मुरादाबाद की प्रीत विहार कॉलोनी में रिहायशी इलाके के बीच अवैध कांच फैक्ट्री से हाहाकार, शोर और धुएं से जीना दुश्वार उत्तर प्रदेश 4 घंटे पहले 10
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित प्रीत विहार कॉलोनी में पिछले एक साल से चल रही अवैध कांच की फैक्ट्री से स्थानीय निवासी बेहद परेशान हैं। मशीनों के भारी शोर, गंदे धुएं और गंदगी के कारण बुजुर्गों, हृदय रोगियों और बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की प्रीत विहार कॉलोनी से एक बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया है। यहां घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके के बीचों-बीच पिछले 1 साल से अवैध रूप से कांच की एक फैक्ट्री चलाई जा रही है। कॉलोनी के अंदरूनी हिस्से में स्थित एक गली में चल रही इस फैक्ट्री की मशीनों से दिन-रात भयंकर शोर निकलता है। इस वजह से आसपास रहने वाले सैकड़ों लोगों का सुख-चैन छिन गया है और उनका अपने ही घरों में रहना दुभर हो चुका है।

रिहायशी इलाके के बीच चल रही कांच गलाने की फैक्ट्री

प्रीत विहार कॉलोनी की एक गली के भीतर स्थापित इस फैक्ट्री में कांच को पिघलाने और अलग-अलग तरह के उत्पाद बनाने के लिए भारी-भरकम मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों के लगातार चलने से होने वाले तेज शोर और कंपन के कारण कॉलोनी में हर समय अशांति बनी रहती है। इतना ही नहीं, कांच गलाने की प्रक्रिया के दौरान निकलने वाला गंदा धुआं और आसपास फैलती गंदगी ने पूरे क्षेत्र के वातावरण को दूषित कर दिया है। हवा में फैले प्रदूषण और भयंकर आवाज के चलते स्थानीय निवासी भयंकर मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं।

बीमारों और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा गंभीर असर

फैक्ट्री से उठने वाले शोर और जहरीले धुएं का सबसे बुरा प्रभाव कॉलोनी में रहने वाले बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ रहा है। लगातार होने वाली तेज आवाजों के कारण बच्चे न तो दिन में ढंग से पढ़ाई-लिखाई कर पाते हैं और न ही रात में चैन की नींद सो पाते हैं। सबसे बदतर स्थिति हृदय रोग (हार्ट पेशेंट) से पीड़ित महिलाओं और बुजुर्गों की है। शोर के कारण उनका दिल घबराता रहता है, मानसिक तनाव चरम पर पहुंच जाता है और उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस होने लगता है। इसके कारण मरीजों को नियमित रूप से दवाइयां खानी पड़ रही हैं और वे गहरी नींद के लिए तरस रहे हैं।

शिकायतों के बावजूद प्रशासन बेखबर

अपनी इस पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए प्रीत विहार कॉलोनी के निवासियों ने हर संभव दरवाजा खटखटाया है। क्षेत्र के लोगों ने शासन-प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचने के लिए कई कदम उठाए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्होंने इस समस्या को लेकर निम्नलिखित जगहों पर लिखित शिकायत दर्ज कराई है:

  • मुख्यमंत्री पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत भेजी गई।
  • कमिश्नर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई।
  • संबंधित थाने में भी कई बार गुहार लगाई गई।

इसके बावजूद अभी तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासनिक अनदेखी से निराश स्थानीय नागरिक केवल यही चाहते हैं कि इस अवैध फैक्ट्री से आने वाला शोर और फैलने वाला प्रदूषण तुरंत बंद कराया जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ सुकून और शांति की जिंदगी जी सकें।

स्थानीय निवासी विमल कौशिक की ज़ुबानी

इस विकट समस्या को लेकर अपनी व्यथा जाहिर करते हुए प्रीत विहार कॉलोनी के निवासी विमल कौशिक ने बताया कि रिहायशी इलाके के बीचो-बीच चल रही कांच की इस फैक्ट्री में शीशे को गलाया जाता है, जिससे अत्यधिक गंदगी फैलती है और विषैला गंदा धुआं निकलता है। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री में चलने वाली तरह-तरह की मशीनों की आवाजें लगातार आती रहती हैं, जिससे पूरा मोहल्ला त्रस्त है। विमल कौशिक के मुताबिक, हमारी कॉलोनी में कई बुजुर्ग, महिलाएं और पड़ोसी रहते हैं जो पहले से ही हृदय रोग जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं। लगातार जारी शोर और प्रदूषण की वजह से उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है और उनका मन हर समय अशांत रहता है। उन्होंने बताया कि इन विपरीत परिस्थितियों के कारण लोगों को रोजाना दवाइयों का सहारा लेना पड़ रहा है, रात में उनकी नींद पूरी नहीं हो पा रही है और मानसिक तनाव इस कदर बढ़ गया है कि अब यहां आम जीवन जीना बेहद मुश्किल हो गया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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