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एक घंटा पहले
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डॉक्टरों ने बचाई जान
पटना में एक बेहद जटिल मेडिकल केस सामने आया है, जहां एक महिला की जान दांव पर लगी थी। पेट के भीतर लगातार हो रहे रक्तस्राव और तेजी से गिरते हीमोग्लोबिन के स्तर ने स्थिति को बेहद नाजुक बना दिया था। जब डॉक्टरों ने इस समस्या की गहराई से जांच की और ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू की, तो एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया। महिला का गर्भ गर्भाशय में प्रत्यारोपित होने के बजाय फैलोपियन ट्यूब में ठहर गया था। ट्यूब फटने के कारण पेट के अंदर लगभग डेढ़ लीटर खून जमा हो गया था। इस गंभीर स्थिति में मरीज का हीमोग्लोबिन स्तर गिरकर महज 6.3 ग्राम प्रति डेसीलीटर तक पहुंच गया था। हाई रिस्क मामलों के विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया और महिला की जान बचाई। अब महिला के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है और माना जा रहा है कि एक से दो दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
परिजनों ने बताई पूरी घटना
मरीज के परिजन संजीव कुमार ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वे आशियाना नगर इलाके से इलाज की तलाश में आए थे। महिला का स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था और खून की कमी एक गंभीर समस्या बन गई थी। शुरुआत में उन्होंने आशियाना नगर के स्थानीय केंद्रों पर इलाज का प्रयास किया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें एम्स ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ओपन सर्जरी कराने की सलाह दी थी। हालांकि, किसी कारणवश उन्होंने वहां ऑपरेशन नहीं कराया। बाद में एक परिचित की सलाह पर वे देवी केयर हॉस्पिटल पहुंचे और डॉ. पंकज कुमार चौधरी से संपर्क किया। महिला को 27 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया और 28 अक्टूबर को ऑपरेशन किया गया। परिजनों के अनुसार, अब महिला की हालत स्थिर और खतरे से बाहर है।
सर्जरी और इलाज का ब्योरा
डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह मामला रप्चर्ड एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का था। इसका मतलब यह है कि फैलोपियन ट्यूब में ठहरा हुआ गर्भ काफी विकसित हो चुका था और उसने ट्यूब को फाड़ दिया था, जिससे महिला के पेट में अंदरूनी ब्लीडिंग शुरू हो गई थी। ऑपरेशन से पहले मरीज का हीमोग्लोबिन स्तर बेहद कम यानी 6.3 ग्राम प्रति डेसीलीटर था। डॉक्टर ने बताया कि सर्जरी की तैयारी के दौरान महिला को एक यूनिट ब्लड चढ़ाया गया ताकि उनकी स्थिति को स्थिर किया जा सके। सफल सर्जरी के दौरान ब्लीडिंग को 50 मिलीलीटर से भी कम रखा गया। चूंकि ट्यूब फटने के कारण पेट और पेल्विक कैविटी में पहले से ही करीब 1.5 लीटर खून जमा था, इसलिए उसे विशेष सक्शन प्रक्रिया के जरिए निकाला गया। डॉक्टर ने उम्मीद जताई है कि मरीज के स्वास्थ्य में इसी तरह सुधार जारी रहा तो अगले 48 घंटे के भीतर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
क्या होती है एक्टोपिक प्रेग्नेंसी
चिकित्सकों के अनुसार, एक सामान्य गर्भावस्था के दौरान फर्टिलाइज्ड अंडाणु गर्भाशय में जाकर विकसित होता है। लेकिन एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में यह प्रक्रिया गर्भाशय के बाहर, अधिकतर मामलों में फैलोपियन ट्यूब में ही पूरी होने लगती है। डॉ. पंकज ने विस्तार से समझाया कि यदि फैलोपियन ट्यूब में स्कार टिश्यू या कोई संक्रमण जैसी समस्या हो, तो फर्टिलाइज्ड अंडाणु के गर्भाशय तक पहुंचने का रास्ता अवरुद्ध हो सकता है। चूंकि फैलोपियन ट्यूब का आकार बहुत संकरा होता है, इसलिए गर्भ विकसित होते ही उस पर दबाव बढ़ जाता है और ट्यूब फट सकती है। ट्यूब फटने के बाद पेट के अंदर तेजी से खून बहने का खतरा बना रहता है, जो किसी भी मरीज को बेहोशी या शॉक की स्थिति में ले जा सकता है। ऐसे मामलों में समय रहते सही पहचान और आपातकालीन उपचार ही एकमात्र रास्ता होता है।
सावधानी है जरूरी
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, योनि से असामान्य रक्तस्राव, बार-बार चक्कर आना या कमजोरी महसूस होना एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के संकेत हो सकते हैं। ट्यूब फटने पर अचानक उठने वाला असहनीय दर्द, बेहोशी और जानलेवा रक्तस्राव जैसी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए यदि किसी को गर्भावस्था की संभावना हो और उसे पेट दर्द या रक्तस्राव जैसी शिकायतें हों, तो बिना किसी देरी के मेडिकल जांच करानी चाहिए। सही समय पर किया गया निदान और इलाज किसी भी महिला को ऐसी गंभीर स्थिति से बचा सकता है।
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