राष्ट्रीय राजनीति
3 घंटे पहले
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विचारों
बैलेट पेपर पर चुनावी दांव की बड़ी हार
लंबे समय से राहुल गांधी, इंडी गठबंधन और उनसे जुड़े इकोसिस्टम ने देश में यह माहौल बनाने की कोशिश की थी कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार वोट चोरी और ईवीएम की सेटिंग के जरिए जीत दर्ज करती है। उनका तर्क था कि अगर चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं, तो परिणाम पूरी तरह से अलग होंगे। हालांकि, हाल ही में चार राज्यों में हुए एमएलसी चुनाव के नतीजों ने इस पूरे नैरेटिव को तार-तार कर दिया है। ये चुनाव पूरी तरह से बैलेट पेपर से आयोजित किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस और उनके सहयोगी दल अपनी साख बचाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।
चार राज्यों के नतीजों ने खोली पोल
देश के चार बड़े राज्यों में कुल 28 सीटों पर एमएलसी चुनाव संपन्न हुए। इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन शून्य रहा है। जिस कर्नाटक में कांग्रेस की अपनी सरकार है, वहां भी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में कांग्रेस उन सीटों को भी नहीं बचा पाई जो पहले से उनके पास थीं। कुल 12 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस एक भी सीट जीतने में विफल रही। कर्नाटक में कांग्रेस की सबसे बड़ी हार बैंगलुरु टीचर सीट पर देखी गई, जहां उनके पांच बार के एमएलसी और पूर्व डिप्टी चेयरमैन को हार का मुंह देखना पड़ा। यहां बीजेपी-जेडीएस गठबंधन ने सभी चारों सीटों पर कब्जा कर लिया है।
बिहार में भी कांग्रेस का बुरा हाल
बिहार में कांग्रेस ने 5 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन नतीजा वही रहा यानी शून्य। दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा 324 वोटों के अंतर से हार गए। यहां मुकाबला कांग्रेस के लिए और भी शर्मनाक रहा क्योंकि वह आरजेडी और सीपीएम जैसे अपने ही गठबंधन सहयोगियों के साथ उलझती दिखी और अंततः सीट गंवा दी। कांग्रेस के इस प्रदर्शन पर खुद पार्टी के भीतर भी असंतोष है। कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने खुलकर माना कि पार्टी ने चुनाव प्रचार में कोई रुचि नहीं दिखाई और उन्हें कहीं भी संपर्क नहीं किया गया। बिहार के अन्य नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी माना कि पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक था और प्रत्याशियों के चयन में भी चूक हुई।
यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर
उत्तर प्रदेश की बात करें तो वहां 11 सीटों पर हुए एमएलसी चुनाव में कांग्रेस का कोई नामोनिशान नहीं दिखा। यहां लड़ाई मुख्य रूप से बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच रही। बीजेपी ने 11 में से 6 सीटें जीतीं, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में 5 सीटें आईं। गोरखपुर शिक्षक सीट पर बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी, लखनऊ शिक्षक सीट पर उमेश द्विवेदी, और मेरठ-सहारनपुर शिक्षक सीट पर श्रीचंद शर्मा ने जीत हासिल की। वहीं, वाराणसी शिक्षक सीट से समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव और आगरा शिक्षक सीट से आकाश अग्रवाल ने जीत दर्ज की। इन चुनावों को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है, इसलिए वोटों की गिनती के दौरान काफी गहमागहमी देखने को मिली।
पीएम मोदी का करारा कटाक्ष
कांग्रेस की इस हार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए उन पर तीखा प्रहार किया है। पीएम ने अपने पोस्ट में लिखा कि चार बड़े राज्यों में बैलेट पेपर से चुनाव हुए थे, और उन्होंने जनता से पूछा कि कांग्रेस ने इनमें से कितनी सीटें जीतीं। इस सवाल के साथ ही उन्होंने कांग्रेस के उस नैरेटिव को पूरी तरह एक्सपोज कर दिया है, जिसमें वे हमेशा बैलेट पेपर को जीत का जरिया बताते थे। बीजेपी ने भी इस मौके पर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनिया को शून्य देने वाला भारत आज देख रहा है कि राजनीति में उस शून्य को कांग्रेस ने अपना लिया है।
1 नवंबर की रैली को लेकर व्यापारियों का विरोध
एक तरफ चुनाव में हार का सामना कर रही कांग्रेस 1 नवंबर को दिल्ली में 10 लाख लोगों की भीड़ जुटाने का दावा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली के व्यापारियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। व्यापारियों के डेलिगेशन ने राहुल गांधी को एक ओपन लेटर लिखा है जिसमें वे दीपावली और धनतेरस जैसे त्योहारों के सीजन में इस रैली को टालने की मांग कर रहे हैं। व्यापारियों का तर्क है कि बार-बार होने वाले प्रदर्शनों और रैलियों से दिल्ली के बाजारों को हजारों करोड़ का नुकसान होता है। उनका कहना है कि अगर राहुल गांधी रैली के फायदे नहीं समझा सके, तो उन्हें यह रैली दीपावली के बाद करनी चाहिए।
बीजेपी का काउंटर मार्च और रणनीति
कांग्रेस की रैली के जवाब में बीजेपी ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। दिल्ली के चांदनी चौक में बीजेपी ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च निकाला। पार्टी का कहना है कि वे इंडी गठबंधन की तरह आम जनता और व्यापारियों को परेशानी में नहीं डालना चाहते। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने स्पष्ट किया कि 1 नवंबर को विपक्ष की रैली के खिलाफ वे मौन यात्रा भी निकालेंगे। बीजेपी का मानना है कि जनसमर्थन मेहनत से मिलता है, न कि सड़क पर तमाशा करने से। रिजीम चेंज के बयानों को खारिज करते हुए बीजेपी नेताओं ने कहा कि नरेंद्र मोदी का कार्यकाल मजबूती से आगे बढ़ रहा है और कांग्रेस के निराधार आरोप उन्हें कहीं नहीं ले जाएंगे।
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