राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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दिल्ली चलो मार्च और सियासी खींचतान
विपक्षी गठबंधन इंडिया द्वारा आगामी 1 नवंबर को आयोजित किए जाने वाले दिल्ली चलो मार्च और रामलीला मैदान की विशाल रैली से ठीक पहले देश की राजनीति में टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है। इस रैली के आयोजन से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
ट्रेनों को लेकर केंद्र पर बड़ा आरोप
केसी वेणुगोपाल का दावा है कि केंद्र सरकार जन आक्रोश से डरी हुई है और इसीलिए देश भर से दिल्ली आने वाले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। उन्होंने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस की ओर से कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद भारतीय रेलवे ने तेलंगाना के कांग्रेस सांसदों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए ट्रेनों की सुविधा देने से मना कर दिया है। इस स्थिति के चलते पार्टी नेताओं ने हैदराबाद स्थित दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है।
दबाव की रणनीति का दावा
कांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्र सरकार की घबराहट साफ दिख रही है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचें। वेणुगोपाल ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे विपक्ष के उस आंदोलन के खिलाफ जनता के गुस्से को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे विपक्ष ने वोट चोरी का नाम दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि 1 नवंबर के कार्यक्रम को देखते हुए, कार्यकर्ताओं और समर्थकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार को तत्काल पर्याप्त ट्रेनों की व्यवस्था करनी चाहिए।
रैली का उद्देश्य और तैयारी
विपक्षी गठबंधन इंडिया द्वारा यह प्रदर्शन मुख्य रूप से कथित चुनावी अनियमितताओं और चुनाव आयोग के कामकाज के तौर-तरीकों के विरोध में किया जा रहा है। इसी सिलसिले में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन तय किया गया है, जिसके लिए देश भर के विभिन्न राज्यों से समर्थकों को राजधानी पहुंचने का आह्वान किया गया है।
विपक्ष का रुख
कांग्रेस का यह कहना है कि केंद्र सरकार प्रशासनिक और रसद संबंधी बाधाएं खड़ी करके इस रैली में लोगों की भागीदारी को सीमित करना चाहती है। पार्टी के अनुसार, वे लगातार रेलवे से विशेष ट्रेनों की मांग करते रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने देरी की और अंततः ट्रेनों की मांग को खारिज कर दिया। यह टकराव इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में दिल्ली में होने वाला यह प्रदर्शन और अधिक आक्रामक हो सकता है, क्योंकि विपक्ष अपनी पूरी ताकत के साथ सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने की तैयारी में जुटा है।
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