जीवनशैली
एक घंटा पहले
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विचारों
राजधानी दिल्ली की तेज-तर्रार जिंदगी में फिटनेस का मतलब अब महंगे जिम, ट्रेडमिल और मॉर्निंग वॉक तक सिमटता जा रहा है। लेकिन इसी शहर के एक खास हिस्से में लोग सेहतमंद रहने के लिए सदियों पुरानी देसी परंपरा की ओर लौट रहे हैं। यहां सुबह की शुरुआत डंबल या आधुनिक मशीनों से नहीं, बल्कि भारी-भरकम मुदगर घुमाने से होती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह पारंपरिक कसरत शरीर को मजबूत बनाने के साथ-साथ आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियों को दूर भगाने में भी कारगर साबित हो रही है।
दिल्ली के साउथ एक्स स्थित हुडको पार्क में फ्रीस्टाइल मुदगर की शुरुआत करने वाले समीर शाह लोगों को प्रशिक्षण देते नजर आते हैं। यहां ट्रेनिंग लेने वालों में देश के कई बड़े आईएएस, पीसीएस अधिकारियों से लेकर आर्किटेक्ट तक शामिल हैं। यहां जुड़े अधिकतर लोगों को कई महीने हो चुके हैं और उनका कहना है कि उनकी कई गंभीर तकलीफें इस दौरान ठीक हो गई हैं।
गर्दन, घुटने और कमर के दर्द में मिली राहत
मुदगर की ट्रेनिंग ले रहे पीयूष सचदेवा ने बताया कि इस अभ्यास से जुड़े उन्हें सिर्फ 15 दिन हुए हैं, लेकिन इतने ही समय में उनके कंधे की जकड़न पूरी तरह दूर हो गई है।
आर्किटेक्ट चेतना का कहना है कि पहले उनके शरीर का संतुलन ठीक से नहीं बन पाता था, लेकिन जब से उन्होंने मुदगर करना शुरू किया है तब से शरीर का बैलेंस सही हो गया है और चलने में होने वाली तकलीफ भी खत्म हो गई है। उन्होंने बताया कि अपनी इस परेशानी को लेकर वे कई बड़े कोच के पास गई थीं, मगर कोई भी इसकी असली वजह नहीं पकड़ पाया। आखिरकार इसी ट्रेनिंग से उन्हें राहत मिली।
रश्मि ने बताया कि वे पिछले 6 महीने से यह प्रशिक्षण ले रही हैं और इसके जरिए उनके घुटने, गर्दन और कमर का दर्द पूरी तरह ठीक हो चुका है। वहीं कई महीनों से अभ्यास कर रहे बम्लेश का कहना है कि उन्हें इससे काफी फायदा हुआ है, शरीर का दर्द दूर हो गया है और दोनों हाथों में रहने वाली जकड़न भी ठीक हो गई है।
गुड़गांव, फरीदाबाद और गाजियाबाद से आ रहे लोग
दिल्ली एनसीआर में फ्रीस्टाइल मुदगर की शुरुआत करने वाले समीर शाह ने बताया कि उन्होंने इसे एक स्टार्टअप के रूप में शुरू किया था। पहले 2 साल उन्होंने खुद इसका प्रशिक्षण लिया और इसके बाद बीते 2 साल से वे दिल्ली एनसीआर में लोगों को मुदगर सिखा रहे हैं।
समीर के मुताबिक, मुदगर को अक्सर लोगों ने या तो अखाड़े में देखा होगा, या भारतीय पहलवानों को कसरत करते हुए, या फिर हमारे प्राचीन ग्रंथों में इसका जिक्र पढ़ा-सुना होगा। उन्होंने इस अखाड़े की विरासत को आम लोगों तक इसलिए पहुंचाया, क्योंकि आज लोग जीवनशैली से जुड़ी तमाम बीमारियों से जूझ रहे हैं।
जिम में जाकर आप बॉडी तो बना सकते हैं, लेकिन पूरे शरीर की मरम्मत नहीं कर सकते। मुदगर एक ऐसी पद्धति है जो पूरे शरीर की मरम्मत करती है, जिसमें गर्दन, सिर के दोनों हिस्से, कंधे, हाथ, कलाई, घुटने और कमर सब शामिल होते हैं।
उन्होंने बताया कि इससे बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिल रहा है, यही वजह है कि लगातार नए लोग इससे जुड़ते जा रहे हैं। फिलहाल गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुड़गांव से लेकर पूरे दिल्ली एनसीआर से लोग यहां पहुंच रहे हैं। अभी यह अभ्यास सिर्फ रविवार को कराया जाता है, लेकिन मांग बढ़ने पर इसे रोजाना कराने की योजना है।
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