राष्ट्रीय राजनीति
3 घंटे पहले
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क्रिप्टो के नाम पर निवेशकों को लगाया चूना
देशभर में निवेश के नाम पर हो रही धोखाधड़ी के मामलों के बीच प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने एक बड़ा खुलासा किया है। हैशपे क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई की है। इस पूरे घोटाले के तार टीसीएक्स नाम की एक फर्जी क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े हैं, जिसमें निवेश करने वाले लोगों को मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाया गया था। आरोपियों ने निवेशकों को लुभाने के लिए बॉलीवुड सितारों का भी इस्तेमाल किया, जिससे प्रभावित होकर लोगों ने भारी रकम का निवेश किया। लेकिन अंत में निवेशकों के विड्राल पर रोक लगा दी गई और उनकी मेहनत की कमाई को अलग-अलग खातों के जरिए ठिकाने लगा दिया गया। इस पूरे मामले में कुल 40 करोड़ रुपये की ठगी का अनुमान है।
छापेमारी के बाद दो आरोपियों की गिरफ्तारी
ईडी के चेन्नई जोनल ऑफिस-2 ने बीते 1 सितंबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत छापेमारी की एक व्यापक मुहिम शुरू की थी। यह जांच पुडुचेरी साइबर क्राइम पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ाई गई। छापेमारी के दौरान टीम ने चेन्नई, कोयंबटूर और कोलकाता जैसे शहरों में फैले 11 ठिकानों पर दबिश दी। इस जांच के दौरान मिले पुख्ता डिजिटल सबूतों और दस्तावेजों के आधार पर मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान की गई। इसके बाद 3 सितंबर को ईडी ने पीएमएलए की धारा 19 के तहत इमरान बाशा और हितेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
आलीशान जीवन जीने में उड़ाया गया पैसा
जांच एजेंसी के अनुसार, इस फ्रॉड में मुख्य रूप से हितेश कुमार, इमरान बाशा और सैयद उस्मान उर्फ बाबू जैसे लोग शामिल थे, जिन्होंने मिलकर हैशपे के नाम से एक फर्जी निवेश मॉडल तैयार किया था। एजेंसी का कहना है कि लोगों से ठगी गई रकम का इस्तेमाल आरोपियों ने अपनी निजी जिंदगी को आलीशान बनाने में किया। उन्होंने इस अवैध पैसे से न केवल विलासितापूर्ण जीवन जिया बल्कि कई संपत्तियां भी खरीदीं। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है। मामले में अभी और भी कई कड़ियां खुलना बाकी है, जिसे लेकर जांच एजेंसियां लगातार अपनी नजर बनाए हुए हैं और आगे की पूछताछ जारी है।
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