बेटियों के जन्म पर गदगद पिता ने शुरू की 170 किलोमीटर की दंडवत कांवड़ यात्रा, 45 दिन में घर तक का संकल्प उत्तराखंड 2 महीने पहले 70
हरियाणा के पानीपत निवासी एक शिवभक्त ने भगवान महादेव से दो बेटियों की मन्नत मांगी थी, जो पूरी होने के बाद अब वे हरिद्वार से दंडवत यात्रा पर निकल पड़े हैं। वे सावन से पहले ही 170 किलोमीटर का सफर तय कर अपने गांव पहुंचेंगे।

हरिद्वार में आस्था का अनोखा नजारा

श्रावण मास की शुरुआत होने में अभी समय बाकी है, लेकिन शिव नगरी हरिद्वार में अभी से आस्था का एक ऐसा दृश्य देखने को मिला है जिसने सबको भावुक कर दिया है। आमतौर पर कांवड़ यात्रा सावन के महीने में होती है, लेकिन हरियाणा के पानीपत से आए एक शिवभक्त ने इस परंपरा से हटकर एक कठिन संकल्प लिया है। यह भक्त अपनी मन्नत पूरी होने के बाद हर की पौड़ी से दंडवत करते हुए अपने गांव की ओर निकल पड़ा है। यह यात्रा न केवल लंबी है, बल्कि इसे पूरा करने का तरीका भी बेहद कष्टसाध्य और भक्ति से भरा हुआ है।

दो बेटियों की मन्नत और शिव की कृपा

इस अद्भुत यात्रा के पीछे की कहानी समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। पानीपत निवासी धर्मवीर ने तीन साल पहले भगवान भोलेनाथ से मन्नत मांगी थी कि उन्हें दो बेटियों का आशीर्वाद मिले। उनकी यह आस्था तब और गहरी हो गई जब वर्ष 2025 में उन्हें पहली संतान के रूप में बेटी हुई और उसके बाद 2026 में दूसरी बेटी का जन्म हुआ। अपनी दोनों बेटियों के बेहतर स्वास्थ्य, उनके उज्जवल भविष्य और लंबी उम्र की कामना के लिए धर्मवीर ने संकल्प लिया था कि मन्नत पूरी होने पर वे हरिद्वार से जल लेकर पैदल यात्रा करेंगे। अब जब महादेव ने उनकी झोली खुशियों से भर दी है, तो वे अपनी सुध-बुध खोकर इस कठिन साधना में जुट गए हैं।

170 किलोमीटर का सफर और दंडवत साधना

धर्मवीर की यात्रा साधारण कांवड़ यात्रा नहीं है। उन्होंने हरिद्वार से लेकर अपने गांव तक 170 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए लेटकर चलने यानी दंडवत का रास्ता चुना है। जब उनसे यह पूछा गया कि उन्होंने सावन के मुख्य पर्व से एक महीने पहले ही यह यात्रा क्यों शुरू कर दी, तो उन्होंने बताया कि यह रास्ता बेहद लंबा है। उनके अनुसार, इस दंडवत यात्रा को पूरा करने में करीब 45 दिन का समय लगेगा। वे चाहते हैं कि सावन के दौरान जब महादेव का जलाभिषेक किया जाए, तब तक वे अपने गांव के शिवालय में पहुंचकर अपनी कांवड़ का जल महादेव को अर्पित कर सकें।

बेटियों के प्रति समाज को संदेश

आज के दौर में जहां कई लोग धन-दौलत, जमीन-जायदाद या बेटे की कामना के लिए मन्नत मांगते हैं, वहीं धर्मवीर ने बेटियों के लिए जो किया वह समाज के लिए एक नजीर है। वे मानते हैं कि बेटियां लक्ष्मी का स्वरूप होती हैं और उनका स्वागत किसी भी अन्य मन्नत से कहीं बढ़कर है। जिन बेटियों को दुनिया के कुछ हिस्सों में पराया धन माना जाता है, उन्हीं के लिए इस पिता का समर्पण और हरिद्वार की सड़कों पर दंडवत करते हुए निकलना लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

भक्ति और विश्वास का संगम

हरिद्वार की गलियों में इस भक्त को देखकर लोग न केवल आश्चर्यचकित हैं, बल्कि उनकी इस आस्था के आगे नतमस्तक भी हो रहे हैं। सावन शुरू होने से पहले ही शिव भक्त का कांवड़ लेकर निकलना इस बात का प्रमाण है कि यदि मन में अटूट विश्वास हो, तो भगवान से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। धर्मवीर अपनी इस यात्रा को सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि महादेव के प्रति अपने आभार की अभिव्यक्ति मानते हैं। उनका यह सफर पूरे 45 दिनों तक जारी रहेगा और अंत में वे अपने गांव में शिव मंदिर पहुंचकर अपनी मन्नत को पूर्णता देंगे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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