राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
तमिलनाडु की राजनीति में नया भूचाल
तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐसा बड़ा सियासी मोड़ आया है, जिसकी उम्मीद शायद कांग्रेस पार्टी ने भी नहीं की होगी। राज्य की सत्ता का समीकरण बदलने के लिए कांग्रेस ने जिस दांव को बेहद सोच-समझकर चला था, वह अब खुद उनके गले की फांस बनता दिख रहा है। साउथ के सुपरस्टार और मुख्यमंत्री थलपति विजय की पार्टी 'तमिलागा वेत्री कड़गम' यानी TVK ने जब अपने गठबंधन सहयोगियों की बैठक बुलाई, तो कांग्रेस के खेमे में हलचल मच गई। इस बैठक ने दिल्ली में बैठे कांग्रेस आलाकमान की नींद उड़ा दी है।
DMK से दूरी और विजय का साथ पड़ रहा महंगा
इस पूरे सियासी नाटक की जड़ में वह बड़ा फैसला है, जो कांग्रेस ने तमिलनाडु में लिया था। कांग्रेस ने दशकों से चले आ रहे अपने पुराने और भरोसेमंद साथी DMK का साथ छोड़कर विजय की नई नवेली पार्टी TVK के साथ हाथ मिलाया था। इस पॉलिटिकल स्विच की बदौलत विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में मदद मिली, लेकिन सत्ता मिलते ही TVK ने अपने तेवर बदलने शुरू कर दिए हैं। TVK के नेताओं और मंत्रियों ने अब एक ऐसा शगूफा छोड़ दिया है, जिसने कांग्रेस के लिए बड़ी असहज स्थिति पैदा कर दी है। उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए विजय को सीधे तौर पर देश का अगला प्रधानमंत्री चेहरा घोषित कर दिया है।
राहुल गांधी बनाम विजय, कांग्रेस के लिए चुनौती
कांग्रेस पार्टी 2029 के चुनाव के लिए राहुल गांधी को ही प्रधानमंत्री पद का अनौपचारिक चेहरा मानकर अपनी रणनीति बना रही है। ऐसी स्थिति में TVK के मंत्रियों का यह कहना कि 'देश को अब दक्षिण से प्रधानमंत्री मिलना चाहिए', दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। तमिलनाडु में कांग्रेस के मंत्रियों ने तो यहाँ तक कह दिया है कि यदि TVK ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में स्वीकार नहीं किया, तो वे कैबिनेट से इस्तीफा देकर बाहर आ जाएंगे। यह धमकी इस बात का प्रमाण है कि गठबंधन के भीतर दरारें कितनी गहरी हो चुकी हैं।
पीएम की रेस में पहले से ही हैं कई दावेदार
राहुल गांधी के लिए 2029 की राह वैसे भी आसान नहीं है। विपक्षी खेमे में पहले से ही कई दिग्गज नेता अपनी दावेदारी या अपने प्रभाव के दम पर राहुल के रास्ते में कांटे बिछा रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी जैसे बड़े रीजनल हैवीवेट नेता पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी की निर्विरोध पीएम उम्मीदवारी पर सवाल खड़े करते रहे हैं। अब दक्षिण भारत से विजय की लोकप्रियता और उनके 9 प्रतिशत से अधिक पॉपुलैरिटी सर्वे के आंकड़े सामने आने के बाद कांग्रेस की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है
राजनीतिक गलियारों में अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या TVK का यह दांव केवल अपनी सौदेबाजी की ताकत बढ़ाने का एक हथकंडा है, या फिर वास्तव में दिल्ली के सिंहासन को चुनौती देने के लिए एक नया साउथ ब्लॉक तैयार किया जा रहा है? जिस तरह से विजय की पार्टी ने अपने पत्ते खोले हैं, उससे साफ है कि वे सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहना चाहते। उनके महत्वाकांक्षी नेता अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े पावर प्ले के रूप में देख रहे हैं।
कांग्रेस की रणनीति पर एक नजर
कांग्रेस ने तमिलनाडु में अपना खोया हुआ आधार वापस पाने के लिए विजय का समर्थन किया था, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। DMK जैसे पक्के साथी का साथ छोड़कर जिस तरह से उन्होंने एक नए और महत्वाकांक्षी स्टार का हाथ थामा, वह अब उनके अपने ही जाल में फंसने जैसा है। 2029 का लक्ष्य अभी दूर है, लेकिन आज की राजनीति में इस तरह के बयानों ने कांग्रेस के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस अपनी बात मनवा पाती है या फिर उन्हें इस नए गठबंधन की कीमत सत्ता खोकर चुकानी पड़ेगी। सस्पेंस अभी बरकरार है और तमिलनाडु से आने वाली हर खबर दिल्ली की धड़कनें तेज कर रही है।
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