मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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मध्य प्रदेश के गुना जिले के कुंभराज में एक मामूली विवाद ने उस समय तनाव का रूप ले लिया, जब दुकान के सामने रखी नमक की बोरियां दो परिवारों के बीच झगड़े की वजह बन गईं। बात इतनी बढ़ी कि दोनों पक्षों के बीच जमकर हंगामा हुआ और लाठी-डंडे तक चल गए। बाद में दोनों ही पक्ष थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ मारपीट तथा गाली-गलौज की शिकायत दर्ज कराई।
नमक की बोरियों से भड़की पुरानी रंजिश
कुंभराज के गोल मंडल इलाके में शनिवार को दो व्यापारी परिवारों के बीच लंबे समय से चली आ रही रंजिश खुली हिंसा में बदल गई। दुकान के सामने रखी नमक की बोरियों को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते लाठी-डंडों तक जा पहुंचा। इस घटना में दोनों पक्षों ने थाना कुंभराज में एक-दूसरे के खिलाफ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई है। खास बात यह रही कि संदीप महेश्वरी एक मामले में खुद पीड़ित हैं, जबकि दूसरे मामले में उन्हीं को आरोपी बनाया गया है।
संदीप महेश्वरी ने बताई आपबीती
पुलिस को दी गई रिपोर्ट में संदीप महेश्वरी (पुत्र बृजवल्लभ महेश्वरी, निवासी गुरू महाराज मंदिर के पास, कुंभराज) ने बताया कि गोल मंडल के पास उनकी दुकान है। उनके अनुसार भगवान बिहानी ने उनकी दुकान के बरामदे में नमक की बोरियां रख दी थीं। जब उन्होंने बोरियां हटाने को कहा तो भगवान बिहानी ने इनकार कर दिया।
संदीप के मुताबिक 6 जून को सुबह करीब 12 बजे जब उन्होंने दोबारा बोरियां हटाने की बात कही, तब भगवान बिहानी अपने साथ श्याम बिहानी, माधव बिहानी और प्रफुल्ल बिहानी को लेकर आ धमके। आरोप है कि चारों ने मिलकर संदीप के साथ मारपीट की। भगवान बिहानी ने डंडे से उनके सिर पर वार किया, जिससे माथे और घुटने में चोट आई और खून बहने लगा। मौके पर झारेड़ा निवासी पवन शर्मा और सीगनपुर निवासी गुलाब सिंह ने बीच-बचाव किया।
भगवान स्वरूप बिहानी का पलटवार
दूसरी ओर किराना दुकान संचालक भगवान स्वरूप बिहानी (वार्ड क्रमांक 14, कुंभराज) ने भी उसी दिन रिपोर्ट दर्ज कराई। उनका आरोप है कि वे अपनी दुकान पर बैठे थे, तभी संदीप महेश्वरी, रिंकू महेश्वरी और ब्रजवल्लभ महेश्वरी ने आकर उनके साथ गाली-गलौज की। उनके अनुसार विरोध करने पर तीनों ने धक्का-मुक्की और मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी दी।
पुलिस ने दोनों शिकायतों पर दर्ज किया मामला
थाना प्रभारी इंस्पेक्टर पंकज त्यागी के निर्देश पर दोनों शिकायतों पर अपराध क्रमांक 91/2026 और 92/2026 दर्ज किए गए हैं। यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी), 115(2), 351(2) और 3(5) के तहत दर्ज कर विवेचना प्रधान आरक्षक मोहम्मद सलीम खान को सौंपी गई है।
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