बिहार
एक घंटा पहले
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खेती में नया प्रयोग और बढ़ती आय
बिहार के छपरा जिले के किसान खेती के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। अब किसान एक ही खेत में एक साथ कई नकदी फसलों को उगाने का सफल तरीका अपना रहे हैं। इस पद्धति के कारण किसानों की आमदनी में दो से तीन गुना तक का इजाफा देखा गया है। कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में अपनाई जा रही यह विधि न केवल मुनाफे वाली है, बल्कि इसमें खर्च और मेहनत भी काफी कम हो जाती है। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर किसान इस मॉडल को तेजी से अपना रहे हैं।
जैविक खेती और मिट्टी का स्वास्थ्य
इस आधुनिक खेती की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह से जैविक होना है। किसान रासायनिक खादों और कीटनाशकों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर रहे हैं, जिसका सीधा फायदा जमीन की उपजाऊ क्षमता पर पड़ रहा है। जैविक तरीके से खेती करने के कारण मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है और फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
कैसे काम करता है फसलों का यह चक्र?
मांझी प्रखंड के शीतलपुर गांव के रहने वाले बगेंद्र कुशवाहा इस सफल खेती का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहे हैं। उन्होंने अपने 10 कट्ठा खेत को इस तरह तैयार किया है कि वहां एक साथ हरी मिर्च और भिंडी की पैदावार ली जा रही है। इस तकनीक के बारे में बताते हुए वे कहते हैं कि सबसे पहले खेत में मिर्च के पौधे लगाए जाते हैं और उसके बाद खाली जगह के बीच में भिंडी के बीज बो दिए जाते हैं। इस तरीके से दोनों फसलें एक-दूसरे के साथ बिना किसी बाधा के पनपती हैं और भरपूर पैदावार देती हैं।
प्रशिक्षण से मिली सफलता
बगेंद्र कुशवाहा को यह नई दिशा कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी से मिले प्रशिक्षण के जरिए मिली। वे पिछले 25 वर्षों से खेती के इस विशेष तरीके को अपना रहे हैं। उन्हें सरकार के जीरो बजट खेती प्रोजेक्ट के अंतर्गत विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। इस ट्रेनिंग में किसानों को सिखाया गया है कि कैसे घर पर ही जीवामृत, घन जीवामृत और दशपर्णी अर्क जैसे प्रभावी जैविक खाद तैयार किए जाएं। वे फसलों के पोषण के लिए केवल इन्हीं जैविक पदार्थों का उपयोग करते हैं।
ज़हर मुक्त खेती का संदेश
बगेंद्र आज पूरी तरह से ज़हर मुक्त और शुद्ध खेती कर रहे हैं। उनकी इस मेहनत और तकनीकी दक्षता को देखने के लिए दूर-दराज के इलाकों से भी किसान उनके खेत तक पहुंच रहे हैं। उनका मानना है कि खेती के इस अनोखे तरीके को अपनाकर कोई भी छोटा या बड़ा किसान अपनी लागत को न्यूनतम रखते हुए अधिकतम लाभ कमा सकता है। यह न केवल आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद है, बल्कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए भी जरूरी है।
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