बिहार
2 घंटे पहले
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मछली पालन के क्षेत्र में नया अवसर
बिहार के गया जिले में मछली पालन का व्यवसाय अब और भी सुगम होने जा रहा है। सरकार द्वारा मत्स्य बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर पहल की जा रही है, जिससे स्थानीय किसानों को काफी लाभ होगा। जिले में उन्नत मत्स्य बीज उत्पादन के लिए कुल 12 इकाइयां स्थापित की जाएंगी, ताकि किसानों को बीज के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े।
सब्सिडी का विवरण और लाभ
उन्नत मत्स्य बीज उत्पादन योजना के अंतर्गत प्रत्येक यूनिट की लागत 1 लाख रुपए तय की गई है। इस पर मिलने वाली सब्सिडी का विवरण इस प्रकार है:
- सामान्य वर्ग के आवेदकों के लिए 50 फीसदी सब्सिडी।
- अत्यंत पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के आवेदकों के लिए 70 फीसदी सब्सिडी।
इन 12 इकाइयों का आवंटन विभिन्न वर्गों के बीच समान रूप से किया गया है, जिसमें सामान्य वर्ग के लिए 4 यूनिट, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 4 यूनिट और अनुसूचित जाति के लिए 4 यूनिट निर्धारित हैं।
पठारी क्षेत्र और विशेष सहायता योजना
मछली पालन से जुड़ी अन्य योजनाओं के तहत भी गया जिले में विकास कार्य किए जा रहे हैं। 'पठारी क्षेत्र तालाब निर्माण आधारित मत्स्य पालन' योजना के माध्यम से अनुसूचित जाति के लाभार्थियों के लिए 15 यूनिट तालाब खुदवाने का लक्ष्य है। प्रत्येक यूनिट में आधा एकड़ तालाब, बोरिंग, सोलर पंप, शेड और इनपुट लागत शामिल है, जिसकी कुल लागत 10 लाख 34 हजार रुपए है। इसमें सरकार की ओर से 80 फीसदी तक अनुदान मिलता है।
इसके अतिरिक्त, 'तालाब मत्स्यिकी विशेष सहायता योजना' के अंतर्गत कुल 23 यूनिट लगाए जाने हैं। इसमें अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 12 और अनुसूचित जाति के लिए 11 यूनिट आरक्षित हैं। इस योजना के तहत प्रति यूनिट 5 लाख 72 हजार रुपए की लागत पर 70 फीसदी सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
आवेदन कैसे करें
जिला मत्स्य विभाग के विस्तार पदाधिकारी नागेंद्र कुमार के अनुसार, जो भी इच्छुक किसान मछली पालन के व्यवसाय से जुड़कर आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट fisheries.bihar.gov.in पर जाकर अपनी पात्रता के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस पहल से न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर मछली बीज की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।
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