रांची की सरिता का कमाल, कटहल के कारोबार से सालाना 23 लाख की कमाई व्यापार एक दिन पहले 10
रांची की रहने वाली सरिता देवी ने कटहल प्रोसेसिंग के जरिए न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि आठ अन्य महिलाओं को भी रोजगार प्रदान कर रही हैं। उनके बनाए उत्पाद आज दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों के साथ अमेजॉन पर भी धूम मचा रहे हैं।

कटहल से बदली जीवन की दिशा

रांची की निवासी सरिता देवी ने एक मिसाल कायम करते हुए कटहल को अपनी सफलता का आधार बनाया है। उन्होंने घर पर ही एक प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की है, जहाँ कटहल का प्रसंस्करण करके विभिन्न खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं। सरकारी सहायता और फूड प्रोसेसिंग स्कीम के तहत मिली सब्सिडी के कारण उनका यह उद्यम आज एक बड़े स्तर पर पहुंच चुका है।

उत्पादों की देश भर में धूम

सरिता देवी के द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की मांग केवल स्थानीय स्तर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब ये दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के बाजारों में भी पहुंच चुके हैं। इसके अतिरिक्त, उनका सामान अमेजॉन जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी काफी लोकप्रिय है। उनके प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं:

  • कटहल के विभिन्न प्रकार के अचार (मीठा, खट्टा और मिक्स)
  • कटहल के कुरकुरे चिप्स
  • पापड़

खास बात यह है कि उनकी तकनीक से पैक किया गया कटहल दो साल तक पूरी तरह सुरक्षित रहता है। उनके बनाए अचार की मांग इतनी अधिक है कि लोग इसे खरीदकर विदेशों तक ले जाते हैं।

आर्थिक मजबूती और सामाजिक बदलाव

इस व्यवसाय ने सरिता के परिवार की स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। वह बताती हैं कि एक समय था जब निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाना उनके लिए एक सपना था, लेकिन आज उनकी मेहनत की बदौलत उनके बच्चे बेंगलुरु से एमबीए की पढ़ाई कर रहे हैं और जल्द ही प्लेसमेंट के लिए तैयार हैं।

सरिता के इस सफर में अन्य महिलाओं का भी बड़ा योगदान है। उन्होंने अपने साथ 8 महिलाओं को काम पर रखा है, जिससे उन्हें भी रोजगार और आर्थिक सहारा मिला है। सरिता का सालाना टर्नओवर अब 23,00,000 रुपये तक पहुंच गया है। वे बताती हैं कि रांची के ग्रामीण क्षेत्रों में कटहल की भरपूर पैदावार होती है, जो पहले खराब हो जाता था। उसी बेकार जाने वाले कटहल को उन्होंने अपना हथियार बनाकर आज आत्मनिर्भरता का सफर तय किया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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