छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से वनों की बड़े पैमाने पर हुई कटाई का चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है। बीते 15 साल के भीतर इस रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा साफ कर दिया गया और इस दौरान अतिक्रमण के लिए करीब 11 लाख पेड़ काट डाले गए। इस खुलासे ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है, और अब वन विभाग सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
इस पूरे विनाश की परतें इसरो (ISRO) के सैटेलाइट डेटा और ड्रोन सर्वे के जरिए खुलीं। उदंती टाइगर प्रोजेक्ट के उपनिदेशक वरुण जैन ने इस मामले को सामने रखा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 15 साल की अवधि में रिजर्व क्षेत्र के लगभग 956 हेक्टेयर में जंगल नष्ट किया गया। जांच में पता चला कि अतिक्रमण करने वालों ने खेती या बसने के मकसद से प्रति हेक्टेयर करीब 1000 पेड़ काटे, जिससे कुल मिलाकर 10 से 11 लाख पेड़ों पर आरी चल गई।
सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली पोल
यह मामला उस समय सामने आया जब वन विभाग अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के दौरान क्षेत्र का विश्लेषण कर रहा था। विभाग ने पुरानी और नई सैटेलाइट तस्वीरों का आपस में मिलान किया और इसके साथ ही ड्रोन के जरिए भी इलाके की निगरानी की गई। इन तस्वीरों में साफ नजर आया कि किस तरह धीरे-धीरे हरे-भरे जंगल को मैदान में बदल दिया गया।
166 अतिक्रमणकारियों पर शिकंजा
वन विभाग ने अब इस मामले में कड़ा रुख अपना लिया है। अब तक 166 अतिक्रमणकारियों की पहचान की जा चुकी है और इन सभी को विभाग की ओर से नोटिस जारी कर दिया गया है। उपनिदेशक वरुण जैन के मुताबिक, इन लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
भूजल स्तर 1000 फीट नीचे खिसका
जंगलों की इस अंधाधुंध कटाई का सीधा असर अब स्थानीय पर्यावरण पर दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में भूजल स्तर 1000 फीट नीचे चला गया है। यह हालात आने वाले समय में पानी के गंभीर संकट की ओर इशारा कर रहे हैं।
वन्यजीव और महानदी कैचमेंट पर मंडराया खतरा
वनों की कटाई ने न सिर्फ जलवायु को प्रभावित किया है, बल्कि महानदी कैचमेंट एरिया पर भी इसका गंभीर असर पड़ा है। जंगल घटने की वजह से बेजुबान जीव-जंतु भी संकट में हैं। वन विभाग ने आशंका जताई है कि प्राकृतिक आवास छिनने से आने वाले समय में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
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