पिता की मौत से टूटा दिल, फिर भी नहीं मानी हार: विश्व कुश्ती चैंपियन बनीं मनीषा भानवाला की संघर्षपूर्ण कहानी खेल एक घंटा पहले 6
विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली मनीषा भानवाला ने अपने दिवंगत पिता को अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि दी। अस्ताना में जीत के बाद मनीषा ने अपने माता-पिता की फोटो वाली टी-शर्ट पहनकर उन्हें याद किया, जो उनके संघर्ष और संकल्प की एक भावुक दास्तान है।

जीत के बाद पिता को समर्पित ऐतिहासिक क्षण

विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के मंच पर जब मनीषा भानवाला ने गोल्ड मेडल जीता, तो वह भारतीय कुश्ती के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बन गया। जीत के तुरंत बाद मनीषा ने जो किया, उसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। उन्होंने अपनी सफेद टी-शर्ट को ऊपर उठाया, जिस पर उनके माता-पिता की तस्वीरें छपी थीं। यह महज एक जीत का जश्न नहीं था, बल्कि यह उस पिता को एक भावुक श्रद्धांजलि थी, जिनके सपने को मनीषा ने अपनी रगों में बसा रखा था। मनीषा के लिए यह स्वर्ण पदक केवल करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार के वर्षों के त्याग और संघर्ष की अंतिम परिणति थी। विशेष रूप से उनके पिता सुरेश के लिए, जिन्होंने मनीषा को एक चैंपियन बनाने का सपना देखा था, लेकिन वर्ष 2022 में एशियाई चैंपियनशिप के लिए रवाना होने से ठीक पहले उनका निधन हो गया था।

एशियाई चैंपियनशिप के दौरान टूटा था दुखों का पहाड़

हरियाणा के जींद की रहने वाली मनीषा भानवाला एक ऐसे किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं, जहां खेलकूद का वातावरण हमेशा से मौजूद रहा है। उनके भाई रिंकू कबड्डी के खिलाड़ी हैं, जबकि उनकी भाभी ममता सिहाग भी खुद एक रेसलर हैं। मनीषा ने बचपन में अपने भाई को गांव में कबड्डी खेलते देखा और वहीं से उनके अंदर खेलों के प्रति आकर्षण पैदा हुआ। मनीषा के भाई रिंकू ने एक बातचीत में बताया कि उनके परिवार में खेलों के प्रति एक जुनून है। उन्होंने कहा कि मनीषा शारीरिक रूप से बहुत शक्तिशाली थी और उसकी मानसिक मजबूती ही उसकी सबसे बड़ी ढाल रही है। रिंकू ने उस दुखद सुबह को याद करते हुए बताया कि जब मनीषा को एशियाई चैंपियनशिप के लिए मंगोलिया जाना था, तब उनके पिता पिछली रात एक जागरण में शामिल होकर आए थे और अगली सुबह दिल का दौरा पड़ने से नींद में ही उनका देहांत हो गया। उस समय मनीषा घर से बाहर कदम भी नहीं रखना चाहती थी, लेकिन परिवार ने उसे समझाया कि यदि उसने कुश्ती छोड़ दी, तो उनके पिता द्वारा उसे एक सफल रेसलर बनाने के लिए की गई सारी मेहनत व्यर्थ चली जाएगी। बहुत मुश्किल से उसे मनाकर मंगोलिया जाने वाली फ्लाइट में बैठाया गया था।

पिता की यादों के साथ अस्ताना के दंगल में उतरीं मनीषा

इस बार अस्ताना रवाना होने से पहले मनीषा ने अपनी जीत को पिता के नाम करने की पूरी तैयारी कर रखी थी। उन्होंने एक विशेष सफेद टी-शर्ट तैयार करवाई थी, जिस पर उनके माता-पिता की तस्वीरें प्रिंट थीं। मनीषा का मानना था कि अगर वह इन यादों को अपने पास रखेंगी, तो उन्हें बड़ी से बड़ी चुनौती से लड़ने की शक्ति मिलेगी। रिंकू के अनुसार, मनीषा ने मन में ठान लिया था कि उसे गोल्ड मेडल जीतकर ही दम लेना है और सबको वह टी-शर्ट दिखानी है। आज जब उसने विश्व चैंपियन का खिताब जीता, तो वह वादा पूरा हो गया। यह उपलब्धि केवल मनीषा की नहीं, बल्कि उनके दिवंगत पिता सुरेश की भी है, जिन्होंने अपनी बेटी को इस मुकाम पर देखने की अंतिम इच्छा रखी थी।

अमेरिकी खिलाड़ी को हराकर रचा इतिहास

गोल्ड मेडल के अंतिम मुकाबले में मनीषा भानवाला का सामना अमेरिकी रेसलर अबीगेल नेट्टे से हुआ। मैच की शुरुआत में मनीषा 0-6 के अंतर से पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और एक जबरदस्त वापसी की। अंत में उन्होंने 8-6 के स्कोर से मुकाबले को अपने नाम करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया। मनीषा ने अपने लंबे करियर के दौरान विभिन्न भार वर्गों में अपनी ताकत दिखाई है। उन्होंने 62 किग्रा, 65 किग्रा और 57 किग्रा भार वर्ग में भी दांव आजमाए हैं। अंततः 29 साल की उम्र में गैर-ओलंपिक 59 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि हौसले और दृढ़ संकल्प के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।

विवेक शर्मा पाबना के खेल संवाददाता हैं, जो क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों की खबरें कवर करते हैं। मैचों के विश्लेषण, खिलाड़ियों की उपलब्धियों और टूर्नामेंट्स पर उनकी गहरी पकड़ है। वे खेल प्रेमियों के लिए हर बड़ी खबर तेजी और सटीकता के साथ लाते हैं।

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