भारत
एक घंटा पहले
6
विचारों
आज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनी हुई है। शहर में आज दो बड़े आयोजन होने वाले हैं, जो लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। एक ओर विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक चुनाव आयोग और हालिया चुनावी घटनाक्रमों को लेकर विरोध दर्ज कराने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी नामक संगठन ने लोकतंत्र की रक्षा के विषय पर एक मॉक पार्लियामेंट यानी नकली संसद का आयोजन किया है, जिसके लिए संसद जैसी विशेष संरचना भी तैयार की गई है। सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी का यह कार्यक्रम एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में सुबह 10:30 बजे शुरू होगा, जिसका मुख्य विषय लोकतंत्र बनाम अराजकता रखा गया है।
किन मुद्दों पर मंथन होगा
सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और संसदीय मर्यादाओं पर विचार-विमर्श करना है। संगठन के अनुसार, इस मंच पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी:
- हाल के दिनों में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का विश्लेषण।
- संसदीय गरिमा और मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखने के उपाय।
- लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और उनकी विश्वसनीयता की समीक्षा।
- राजनीतिक जवाबदेही और उनके उत्तरदायित्व का निर्धारण।
इसके अलावा, इस कार्यक्रम में ईवीएम की कार्यप्रणाली, चुनाव आयोग की भूमिका और एसआईआर से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी गंभीर बहस देखने को मिलेगी। मंच पर इस बात पर भी चर्चा होगी कि वोट चोरी के आरोपों और लोकतांत्रिक असहमति तथा अराजकता के बीच आखिर बारीक अंतर क्या है।
कार्यक्रम से भाजपा ने क्यों बनाई दूरी
दिलचस्प बात यह है कि सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी ने इस आयोजन को किसी भी प्रत्यक्ष राजनीतिक एजेंडे से अलग रखने का दावा किया है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी है, हालांकि कार्यक्रम का नाम और इसकी थीम भाजपा के वैचारिक एजेंडे के काफी करीब नजर आती है।
इंडिया गठबंधन का जन महाभियोग
दूसरी ओर, विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने पहले जिस आयोजन को मॉक पार्लियामेंट के रूप में पेश करने की योजना बनाई थी, उसे अब जन महाभियोग का नाम दिया गया है। यह पूरा कार्यक्रम चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में आयोजित हो रहा है। इस सत्र का संचालन पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार करेंगी और उनकी सहायता के लिए समाजवादी पार्टी के एक सांसद मौजूद रहेंगे। यह कार्यक्रम दोपहर 3 बजे से शुरू होकर शाम 7:30 बजे तक चलेगा और अंत में राष्ट्रगान के साथ इसका समापन किया जाएगा। कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है:
- कुल 19 राजनीतिक दलों के नेताओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा।
- अधिकांश वक्ताओं को पांच-पांच मिनट का समय आवंटित किया गया है, जबकि समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों को दस-दस मिनट का समय बोलने के लिए दिया जाएगा।
- मंच पर उन आम नागरिकों को भी आमंत्रित करने की योजना है, जिनके नाम मतदाता सूची से काट दिए गए थे।
विपक्ष का स्पष्ट मानना है कि यह आयोजन केवल एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जनता की चिंताओं को प्रकट करने का एक सशक्त मंच है।
भाजपा की जवाबी रणनीति और पदयात्रा
विपक्ष ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली की घोषणा की है, जिसमें एसआईआर और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी। इसके जवाब में भाजपा ने कमर कस ली है। भाजपा देशभर में लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ के नाम से पदयात्रा निकाल रही है। इस अभियान की कमान पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन संभाले हुए हैं। इस यात्रा की शुरुआत 28 अक्टूबर को दिल्ली के चांदनी चौक इलाके से की गई थी। दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात के कई शहरों में भी यह पदयात्रा निकाली जा रही है। भाजपा का मुख्य उद्देश्य विपक्ष के उन आरोपों की हवा निकालना है, जिनमें विपक्षी पार्टियां अपनी हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराती हैं और धरना-प्रदर्शन के बहाने अशांति फैलाने का प्रयास करती हैं।
Comments
0 comment