गर्मी में मछली पालन से नहीं होगा नुकसान, इन आसान उपायों से बढ़ेगा मुनाफा और तेज होगी मछलियों की ग्रोथ उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 1
मेरठ में बढ़ते तापमान से जूझ रहे मछली पालकों के लिए जिला मत्स्य कार्यकारी अधिकारी बिनोद कुमार ने ऑक्सीजन, फीडिंग और पानी की गहराई से जुड़े जरूरी सुझाव साझा किए हैं, साथ ही एरेटर सिस्टम पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी की जानकारी भी दी है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्वरोजगार के तौर पर मछली पालन को अपनाने वाले युवाओं के सामने इन दिनों भीषण गर्मी एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। खेतों में बड़े-बड़े तालाब बनवाकर अच्छी आमदनी की उम्मीद लगाए बैठे ये युवा बढ़ते तापमान से खासे परेशान हैं, क्योंकि गर्मी मछलियों की ग्रोथ पर सीधा असर डाल रही है। मछली पालकों की इसी परेशानी को देखते हुए जिला मत्स्य कार्यकारी अधिकारी बिनोद कुमार ने गर्मी के मौसम में मछलियों को सुरक्षित रखने और बेहतर उत्पादन पाने के कई अहम तरीके बताए हैं।

तालाब में ऑक्सीजन और पानी के तापमान पर दें खास ध्यान

बिनोद कुमार के अनुसार, जैसे-जैसे गर्मी का असर बढ़ता है, वैसे-वैसे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा घटने लगती है। इसलिए मछली पालन से जुड़े सभी युवाओं को तालाब में ऑक्सीजन के स्तर पर विशेष नजर रखनी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि सुबह और शाम के समय तालाब में ताजा पानी जरूर चलाएं, ताकि तालाब का पानी ठंडा बना रहे।

पानी गर्म होने पर थम जाती है मछलियों की बढ़त

मत्स्य अधिकारी ने बताया कि तालाब में मछलियां तीन परतों में रहती हैं। जब सबसे ऊपरी यानी पहली परत का पानी गर्म होने लगता है, तो मछलियां दूसरी परत की ओर चली जाती हैं। पानी और अधिक गर्म होने पर ये धीरे-धीरे सबसे निचली परत तक पहुंच जाती हैं, जिसके कारण उनकी स्वाभाविक ग्रोथ रुकने लगती है। उन्होंने कहा कि अगर युवा मछली पालक पानी का संतुलन और ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखेंगे, तो मछलियां अपने तय स्थान पर रहकर बेहतर ढंग से बढ़ेंगी।

फीडिंग और पानी की गहराई में बरतें ये सावधानियां

बिनोद कुमार ने आगे बताया कि गर्मी के मौसम में मछलियों को सिर्फ सुबह और शाम के समय ही ठंडा आहार देना चाहिए। तालाब में जरूरत से ज्यादा चारा नहीं डालना चाहिए, क्योंकि बचा हुआ चारा पानी में सड़कर उसकी गुणवत्ता खराब कर देता है। उन्होंने सुझाव दिया कि मछलियों के कुल वजन के हिसाब से केवल दो से तीन प्रतिशत तक ही संतुलित फीड देना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने तालाब में पानी की गहराई कम से कम 7 से 8 फीट तक बनाए रखने की सलाह दी और कहा कि समय-समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच करते रहना चाहिए, ताकि मछलियों की ग्रोथ बेहतर बनी रहे।

एरेटर सिस्टम पर सरकार दे रही सब्सिडी

मछली पालकों की सुविधा के लिए सरकार एरेटर सिस्टम भी उपलब्ध करा रही है, जिसके लिए इच्छुक किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह सिस्टम तालाब के लिए बेहद उपयोगी साबित होता है। मत्स्य अधिकारी ने यह भी कहा कि गर्मी के दिनों में मछलियों के खान-पान का खास ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि इस मौसम में अधिक भोजन खिलाना उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

अंत में उन्होंने सुझाव दिया कि यदि पालक समय-समय पर तालाब में नमक और चूने का इस्तेमाल करते रहें, तो मछली का उत्पादन काफी बेहतर रह सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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