उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
2
विचारों
क्या है पूरा मामला
फतेहपुर जिले में करीब चार दशक पहले हुई एक डकैती के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। वर्ष 1984 में हुसैनगंज थाना क्षेत्र के काजी का पुरवा गांव में चार बदमाशों ने एक घर में घुसकर लूटपाट और मारपीट की थी। ग्रामीणों की सक्रियता के कारण उस समय तीन आरोपियों को मौके पर ही पकड़ लिया गया था, जिनके नाम धुन्ना, मइयादीन और शिवभूषण थे। इस घटना में पीड़ितों को चोटें आई थीं और आरोपियों के पास से हथियार भी बरामद किए गए थे।
ट्रायल कोर्ट का पुराना फैसला
इस मामले में फतेहपुर की निचली अदालत ने 18 सितंबर 1986 को फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने उन्हें IPC की धारा 394 और 397 के तहत 7 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अतिरिक्त, आरोपी शिवभूषण को शस्त्र अधिनियम के तहत 1 वर्ष की सजा और दी गई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जो पिछले 39 साल से लंबित थी। इस बीच एक आरोपी मइयादीन की मृत्यु हो चुकी है।
क्यों मिली हाईकोर्ट से राहत
न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने 23 जून को इस मामले में अपना निर्णय सुनाया। कोर्ट ने धुन्ना और शिवभूषण की दोषसिद्धि को तो बरकरार रखा, लेकिन जेल भेजने के बजाय उन्हें प्रोबेशन पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने राहत देने के पीछे निम्नलिखित तर्क दिए हैं:
- दोनों आरोपियों की उम्र अब 60 साल से अधिक हो चुकी है।
- उनका पहले का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वे प्रथम अपराधी हैं।
- अपील के निपटारे में 39 साल का लंबा समय बीत चुका है, जिससे वे पहले ही मानसिक और कानूनी दबाव झेल चुके हैं।
पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा
हाईकोर्ट ने राहत देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि समाज के प्रति उनकी जवाबदेही बनी रहेगी। अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपी पीड़ितों को 75 हजार रुपये का मुआवजा प्रदान करेंगे। कोर्ट ने माना कि भले ही अपराध गंभीर था, लेकिन लंबी कानूनी देरी और आरोपियों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्हें सुधार का एक अंतिम मौका दिया जाना उचित है।
Comments
0 comment