जीवनशैली
6 घंटे पहले
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विचारों
त्योहार की तैयारियों में साड़ियों का विशेष महत्व
हरितालिका तीज का पर्व महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस खास दिन पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक रूप से सजती-संवरती हैं। त्यौहार नजदीक आते ही बाजार में रौनक बढ़ जाती है और महिलाएं अपनी पसंद की साड़ियों की खरीदारी में जुट जाती हैं। यदि आप भी इस तीज पर कुछ खास और अलग दिखना चाहती हैं, तो भागलपुरी सिल्क की साड़ियाँ आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती हैं। भागलपुर की सिल्क साड़ियाँ न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी चमक और गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं।
रंगों और कपड़ों की नई पसंद
इस बार की तीज में साड़ियों के चयन को लेकर बुनकर संजीव कुमार ने कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उनके अनुसार, महिलाओं के बीच विशेष रूप से हरे, लाल और मैरून रंगों की साड़ियों की भारी मांग बनी हुई है। बुनकरों ने बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के कपड़ों का इस्तेमाल किया है। इन विकल्पों में प्रमुख हैं:
- तसर सिल्क
- मलवरी सिल्क
- अरंडी सिल्क
- मटका सिल्क
- सेमी सिल्क
इन कपड़ों का उपयोग करके विभिन्न प्रकार की डिजाइनर साड़ियाँ तैयार की गई हैं जो महिलाओं को काफी आकर्षित कर रही हैं।
साड़ियों की विस्तृत रेंज और कीमतें
संजीव कुमार ने आगे बताया कि वर्तमान में बाजार में कई तरह के काम वाली साड़ियाँ मौजूद हैं। इनमें मलवरी सिल्क पर प्लेन और वर्क की हुई साड़ियाँ, कांजीवरम स्टाइल की साड़ियाँ और तसर पर जरी वर्क व कटवर्क वाली साड़ियाँ शामिल हैं। इन साड़ियों की कीमत 1500 रुपये से शुरू होकर 11,000 रुपये तक जाती है। यदि आप भी इन साड़ियों को खरीदना चाहती हैं, तो आप भागलपुर के तांती बाजार का रुख कर सकती हैं, जहाँ सिल्क के कपड़ों की कई दुकानें उपलब्ध हैं।
बुनकर ही हैं असली डिजाइनर
भागलपुर के साड़ी उद्योग की एक बहुत बड़ी खासियत यह है कि यहाँ साड़ियों के पैटर्न तैयार करने के लिए किसी बाहरी प्रोफेशनल डिजाइनर की मदद नहीं ली जाती है। यहाँ के हुनरमंद बुनकर अपनी रचनात्मकता और कल्पनाशीलता का उपयोग करके खुद ही नए डिजाइन और पैटर्न विकसित करते हैं। स्थानीय बुनकर हेमंत का मानना है कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में बाजार में अपनी जगह बनाए रखने के लिए लगातार बदलाव करना अनिवार्य है। जब साड़ियों में नई डिजाइनिंग देखने को मिलती है, तो ग्राहकों का रुझान भी बढ़ता है और बुनकरों को भी नई चीजें बनाने में आनंद आता है। चूँकि हर बुनकर का काम करने का तरीका और शैली अलग होती है, इसलिए भागलपुर की साड़ियों के डिजाइन पूरी तरह से मौलिक और एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। यह कला और कौशल का ही परिणाम है कि यहाँ की साड़ियाँ हमेशा फैशन में बनी रहती हैं और महिलाओं की पहली पसंद बनी हुई हैं।
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