मध्य प्रदेश
2 घंटे पहले
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खरीफ के मौसम में सिर्फ अनाज और नकदी फसलें ही नहीं उगाई जातीं, बल्कि अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए किसान अब फूलों की खेती की ओर भी रुख कर रहे हैं। सागर जिले में पिछले तीन-चार सालों के दौरान फूलों की खेती का रकबा अचानक से काफी बढ़ गया है। गेंदा यानी मेरीगोल्ड अब केवल सजावट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह किसानों की कमाई का अच्छा साधन भी बन चुका है।
जो किसान खरीफ सीजन में गेंदा की खेती करना चाहते हैं, उन्हें तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए। ध्यान रखने वाली बात यह है कि अगर फूल तय समय से थोड़ा पहले तैयार हो जाए, तो उसका दाम बेहतर मिलता है। इसी वजह से किसानों को जून के महीने से ही इसकी तैयारी कर लेनी चाहिए।
भारत में प्रचलित हैं गेंदा की दो वैरायटी
सागर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव बताते हैं कि भारत में गेंदा की दो किस्में काफी प्रचलित हैं — अमेरिकन गेंदा और फ्रेंच गेंदा। इसके अलावा कुछ उन्नत किस्में भी हैं, जिन्हें ओपी वैरायटी कहा जाता है।
ओपी वैरायटी में बीज मौजूद रहते हैं, जिन्हें किसान फूलों से निकालकर अगले साल बुवाई के लिए इस्तेमाल कर सकता है। दूसरी ओर हाइब्रिड प्रजाति के बीज हर बार बाजार से खरीदने पड़ते हैं और ये महंगे भी होते हैं, लेकिन इनकी उपज बहुत अच्छी रहती है।
जून में लगाई जाती है हाइब्रिड किस्म
डॉक्टर यादव के अनुसार, पहले जब आम तौर पर गेंदा लगाया जाता था तो इतनी पैदावार हो जाती थी कि किसानों को उसका उचित दाम नहीं मिल पाता था। ज्यादातर त्योहार अक्टूबर तक आ जाते हैं, जिससे इस दौरान गेंदा की मांग बहुत बढ़ जाती है।
गेंदा की हाइब्रिड किस्म जून के महीने में लगाई जाती है। हाइब्रिड पौधों की शुरुआती दौर में विशेष देखभाल जरूरी होती है। इनमें ढाई से 3 महीने में ही फूल आना शुरू हो जाते हैं और जब त्योहारी सीजन आता है, तब ये बेहतरीन फूल देते हैं तथा भाव भी अच्छा मिलता है।
पौधे कैसे लगाएं
पौधे लगाने से पहले बीजों का उपचार ट्राइकोडर्मा या सुडोमोनास से कर लेना चाहिए, ताकि पौधों पर तनाव न आए और फंगस आदि न लगे। पौधों को डेढ़ बाय 2 फीट की दूरी पर लगाना चाहिए।
गर्मी के मौसम में रोपाई सुबह या शाम के समय करनी चाहिए। खेत में नमी हमेशा बनाए रखना जरूरी है, हालांकि मानसून आने के बाद इस तरह की कोई दिक्कत नहीं रहती।
गेंदा की खेती में कब आती है समस्या
गेंदा की खेती में सबसे बड़ी परेशानी तब आती है जब बारिश ज्यादा होने लगती है। ऐसे में अगर किसान मेड-नाली पद्धति से इसकी खेती करें, तो यह ज्यादा फायदेमंद रहता है। ड्रिप पद्धति पर लगाना भी बहुत अच्छा रहता है, क्योंकि इससे उपज अच्छी मिलती है और देखभाल में भी सुविधा रहती है।
हालांकि इस फसल पर रस चूसक कीट बहुत लगते हैं, जिनसे बचाव के लिए नीम के तेल का छिड़काव किया जा सकता है। गेंदा की खेती में एक एकड़ भूमि के लिए लगभग 600-800 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
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