भारत
एक महीने पहले
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विचारों
मिश्रित खेती से बदल रही किसानों की तकदीर
गोंडा जिले के किसान अब आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती को मुनाफे का सौदा बना रहे हैं। पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़कर अब किसान मिश्रित खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे उन्हें कम लागत में अधिक लाभ मिल रहा है। सोनू निषाद नामक किसान ने परवल की खेती के साथ हल्दी लगाकर एक अनूठी पहल की है, जो दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
खाली जगह का सही उपयोग
सोनू निषाद ने बताया कि आमतौर पर परवल की खेती में खेत में काफी जगह खाली रह जाती है। इसी खाली जमीन का उपयोग करने के लिए उन्होंने हल्दी लगाने का निर्णय लिया। इस तकनीक के माध्यम से वे एक ही खेत से दो फसलों का उत्पादन ले रहे हैं, जिससे खेत की उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। उनका कहना है कि परवल के पौधों के बीच हल्दी लगाने से उन्हें अतिरिक्त आय का साधन मिल गया है।
लागत और मुनाफे का गणित
सोनू निषाद ने साझा किया कि इस मिश्रित खेती के लिए उन्होंने लगभग 4 बीघा जमीन का उपयोग किया है। इस पूरी खेती में उनकी कुल लागत 25 से 30 हजार रुपये के बीच आती है। वहीं, यदि मुनाफे की बात करें तो उन्हें सालाना 2 से 3 लाख रुपये की अच्छी खासी कमाई हो रही है। आर्थिक तंगी के कारण हाई स्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले सोनू ने आज खेती को अपना सफल व्यवसाय बना लिया है।
खेती की देखरेख और तकनीक
परवल की फसल के बारे में जानकारी देते हुए सोनू बताते हैं कि एक बार लगाने के बाद परवल का पौधा लगभग 3 से 5 साल तक लगातार फल देता है। हालांकि, इसके लिए पौधों की सही देखभाल, नियमित सिंचाई और समय-समय पर खरपतवार को नियंत्रित करना बहुत आवश्यक है। उन्हें पानी संस्थान के माध्यम से सहफसली खेती की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने छोटे स्तर पर प्रयोग किया और सफलता मिलने पर अब वे बड़े स्तर पर इसे कर रहे हैं।
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