हरियाणा
एक घंटा पहले
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विचारों
बेटों के होते हुए भी अकेले क्यों हैं सुरेश?
फरीदाबाद में एक मार्मिक मामला सामने आया है, जहां 70 साल के सुरेश प्रसाद अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर हैं। सुरेश प्रसाद देख पाने में असमर्थ हैं, लेकिन उनके मन में अपने बच्चों के लिए प्यार आज भी पूरी तरह जीवित है। वे पिछले करीब एक महीने से फरीदाबाद के एक वृद्धाश्रम में अपना समय काट रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उनके परिवार के सदस्य शहर में ही मौजूद हैं, फिर भी किसी ने उनकी सुध नहीं ली और न ही उनकी गुमशुदगी या तलाश को लेकर कोई शिकायत दर्ज की गई है।
परिवार का ब्यौरा
वृद्धाश्रम में रह रहे सुरेश प्रसाद ने अपने बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनके परिवार में बेटा, बहू और दो पोते शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उनके कुल तीन बेटे थे, जिनमें से सबसे बड़े बेटे का निधन हो चुका है। परिवार का अन्य सदस्य, यानी उनका छोटा बेटा, फरीदाबाद में ही निवास करता है। बावजूद इसके, आज सुरेश प्रसाद किसी का सहारा पाने की जगह वृद्धाश्रम की चारदीवारी में दिन बिताने को विवश हैं।
कैसे पहुंचे वृद्धाश्रम?
इस बुजुर्ग व्यक्ति के वृद्धाश्रम तक पहुंचने की कहानी काफी दुखद है। वृद्धाश्रम की संचालक अनीता मलिक ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि सुरेश प्रसाद खुद चलकर यहां नहीं आए थे, बल्कि पुलिस उन्हें यहां छोड़कर गई थी। फिलहाल, वे वृद्धाश्रम में ही रह रहे हैं और अपनों के साथ की कमी को महसूस कर रहे हैं। जिस उम्र में उन्हें अपने बच्चों के साथ सुरक्षित महसूस करना चाहिए था, उस उम्र में वे अपनों की बेरुखी का सामना कर रहे हैं।
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