30 दिन में तैयार, बेहतर कमाई: साहुपुरा के किसान बसंत के लिए पालक की 'रौनक' किस्म बनी फायदे का जरिया हरियाणा 3 महीने पहले 49
फरीदाबाद के साहुपुरा गांव के किसान बसंत ने एक एकड़ में 'रौनक' किस्म की पालक उगाई है, जो महज 30 दिनों में तैयार हो जाती है। करीब 25 हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत वाली यह फसल दूसरी सब्जियों से ज्यादा मुनाफा देकर परिवार की आजीविका का सहारा बनी हुई है।

फरीदाबाद इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। दोपहर के समय जब ज्यादातर लोग घरों के भीतर एसी और पंखों के नीचे राहत तलाश रहे होते हैं, उसी समय जिले के किसान खेतों में पसीना बहाते नजर आते हैं। बल्लभगढ़ के साहुपुरा गांव के किसान बसंत भी इन्हीं में शामिल हैं। उन्होंने अपने खेत में पालक की ऐसी खेती की है, जो आसपास के पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां दूसरी सब्जियों से किसानों को खास मुनाफा नहीं मिल पा रहा, वहीं पालक की यह किस्म उन्हें अच्छी आमदनी दे रही है। बसंत ने करीब एक एकड़ जमीन पर पालक लगाई है, जो उनके लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है।

कौन सी किस्म की पालक चुनें

अपने अनुभव साझा करते हुए बसंत बताते हैं कि वे बल्लभगढ़ के साहुपुरा गांव के निवासी हैं और उन्होंने अपने खेत में 'रौनक' किस्म की पालक लगाई है। उनके मुताबिक, इस किस्म की सबसे बड़ी खूबी इसके साफ और चौड़े पत्ते हैं। समय पर देखभाल मिलने पर इसकी बढ़वार बहुत तेजी से होती है। सामान्य पालक की तुलना में यह किस्म जल्दी तैयार हो जाती है और महज 30 दिनों में कटाई के लायक हो जाती है, जिससे मुनाफा भी जल्दी मिलने लगता है।

सामान्य पालक और रौनक किस्म में फर्क

बसंत के अनुसार सामान्य पालक और रौनक किस्म में काफी अंतर है। सामान्य किस्म की पालक को बढ़ने में अधिक समय लगता है, जबकि यह हाइब्रिड बीज तेजी से वृद्धि करता है। उत्पादन में करीब 10 से 20 प्रतिशत का अंतर भले ही आ जाए, लेकिन इसकी बेहतर गुणवत्ता और बाजार में अच्छी मांग के चलते किसान को फायदा मिल ही जाता है। यही वजह है कि आसपास के किसान भी इस किस्म की जानकारी लेने उनके पास पहुंच रहे हैं।

खेती का तरीका क्या है

बुवाई से पहले की तैयारी के बारे में बसंत बताते हैं कि उन्होंने खेत की 5 से 6 बार जुताई करवाई। इसके बाद मेड बनाई गई और रोटावेटर चलाकर खेत को तैयार किया गया। फिर बीज बिखेरकर कल्टीवेटर की मदद से उसे मिट्टी में मिला दिया गया। एक एकड़ में करीब 25 से 30 किलो बीज की जरूरत पड़ती है।

लागत और मौजूदा मंडी भाव

बसंत के मुताबिक इस खेती में लगभग 25 हजार रुपये प्रति एकड़ तक की लागत आती है। फिलहाल मंडी में पालक की एक गड्डी करीब 3 रुपये में बिक रही है। इस भाव पर लागत भी निकल आती है और अच्छा मुनाफा भी हो जाता है।

दूसरी फसलों से ज्यादा कमाई पालक में

बसंत बताते हैं कि उनके पास अपनी खुद की जमीन भी है और कुछ जमीन उन्होंने पट्टे पर भी ले रखी है। पट्टे वाली जमीन का किराया करीब 40 हजार रुपये प्रति एकड़ देना पड़ता है, फिर भी पालक की यह किस्म उन्हें फायदा दे रही है। उनके खेत में दूसरी सब्जियां भी लगी हैं, लेकिन उनसे उतनी कमाई नहीं हो रही जितनी इस पालक से हो रही है। कई सब्जियों में तो नुकसान तक उठाना पड़ रहा है, जबकि पालक लगातार बेहतर आमदनी दे रही है।

सही देखभाल है सबसे जरूरी

बसंत का कहना है कि उनका पूरा परिवार खेती पर ही निर्भर है। पालक की फसल में कभी-कभी कीट लग जाते हैं, लेकिन वे जिस कंपनी से बीज खरीदते हैं, वहीं से सलाह लेकर दवाइयां भी ले आते हैं। सही समय पर दवा और उचित देखभाल करने से फसल ठीक बनी रहती है।

सेहत के लिए फायदेमंद पालक

पालक सेहत के लिए बेहद लाभकारी हरी सब्जी मानी जाती है। इसमें आयरन के साथ-साथ विटामिन A, C और K समेत कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। नियमित रूप से पालक खाने से शरीर में खून की कमी दूर होती है और हीमोग्लोबिन बढ़ता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाने और आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने में मददगार है।

पालक में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। इसके अलावा यह दिल को स्वस्थ रखने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने तथा त्वचा और बालों की सेहत सुधारने में भी सहायक माना जाता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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