जीवनशैली
एक घंटा पहले
1
विचारों
उर्दू अदब की दुनिया में फ़हमी बदायूनी का नाम बेहद एहतराम और मक़बूलियत के साथ लिया जाता है। उनकी ख़ासियत यह थी कि वे बहुत आसान शब्दों में ज़िंदगी की गहरी और दार्शनिक बातें कह जाते थे। इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में उनकी शायरी को नौजवानों के बीच ज़बरदस्त शोहरत मिली है और लोग इसे अपने स्टेटस तथा स्टोरी में बड़े चाव से इस्तेमाल करते हैं।
'छोटी बहर का उस्ताद'
20 अक्टूबर 2024 को 72 वर्ष की उम्र में फ़हमी बदायूनी का इंतक़ाल हो गया। उन्हें "छोटी बहर का उस्ताद" कहा जाता है, यानी वे बेहद छोटे और सीधे-सादे शब्दों के ज़रिए इंसानी जज़्बात, तन्हाई, मोहब्बत और ज़िंदगी की हक़ीक़त को बयां कर देते थे। शायद यही वजह है कि उनकी शायरी आज भी पढ़ने वालों के दिलों तक पहुंच जाती है। यहां हम उनके कुछ चुनिंदा और मशहूर शेर पेश कर रहे हैं।
फ़हमी बदायूनी के मशहूर शेर
छत का हाल बता देता हैपरनाले से गिरता पानी
कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेचुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
यार तुम को कहां कहां ढूंडाजाओ तुम से मैं बोलता ही नहीं
मर गया हम को डांटने वालाअब शरारत में जी नहीं लगता
शहसवारों ने रौशनी मांगीमैं ने बैसाखियां जला डालीं
फूलों को सुर्ख़ी देने मेंपत्ते पीले हो जाते हैं
तोड़े जाते हैं जो शीशेवो नोकीले हो जाते हैं
तिरी तस्वीर, पंखा, मेज़, मुफ़लरमिरे कमरे में गर्दिश कर रहे हैं
पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिराकितना आसान था इलाज मिरा
फिर उसी क़ब्र के बराबर सेज़िंदा रहने का रास्ता निकला
तन्हाई और मोहब्बत के रंग
कहीं कोई कमां ताने हुए हैकबूतर आड़े-तिरछे उड़ रहे हैं
टहलते फिर रहे हैं सारे घर मेंतिरी ख़ाली जगह को भर रहे हैं
मुझ पे हो कर गुज़र गई दुनियामैं तिरी राह से हटा ही नहीं
मैं तो रहता हूं दश्त में मसरूफ़क़ैस करता है काम-काज मिरा
काश वो रास्ते में मिल जाएमुझ को मुंह फेर कर गुज़रना है
जब तलक क़ुव्वत-ए-तख़य्युल हैआप पहलू से उठ नहीं सकते
जो कहा वो नहीं किया उस नेवो किया जो नहीं कहा उस ने
आज पैवंद की ज़रूरत हैये सज़ा है रफ़ू न करने की
Comments
0 comment