शहजाद भट्टी नेटवर्क को UAPA के तहत घोषित किया आतंकी संगठन, जानें ISI के इस प्रॉक्सी वार का पूरा खेल भारत एक घंटा पहले 5
केंद्र सरकार ने पाकिस्तान से संचालित शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह सिंडिकेट हाइब्रिड वॉरफेयर के जरिए भारतीय युवाओं को बरगलाकर देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया था।

शहजाद भट्टी नेटवर्क पर केंद्र सरकार का बड़ा प्रहार

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके समूचे नेटवर्क को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA, 1967 के दायरे में लाते हुए एक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह फैसला 16 सितंबर 2026 को जारी एक राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि शहजाद भट्टी का यह नेटवर्क पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा छेड़े गए हाइब्रिड और प्रॉक्सी युद्ध का एक नया और खतरनाक चेहरा है। अब इस नेटवर्क को औपचारिक रूप से आतंकी संगठन करार दिए जाने के बाद, सुरक्षा बल इसके खिलाफ और भी सख्ती से कानूनी कार्रवाई कर सकेंगे।

इंटरनेट और सोशल मीडिया का घातक इस्तेमाल

जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अब पारंपरिक आतंकवाद के बजाय तकनीक का सहारा ले रही है। सोशल मीडिया और इंटरनेट का उपयोग करके भारतीय युवाओं को ऑनलाइन जाल में फंसाया जा रहा है। इन युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल करने का काम व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। इस पूरी साजिश के केंद्र में शहजाद भट्टी को एक मोहरे के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पाकिस्तान की धरती से भारत के युवाओं को बरगलाने का काम करता है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अब तक इस मॉड्यूल के खिलाफ 12 एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें 51 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों के पास से हैंड ग्रेनेड, पेट्रोल बम और विदेशी हथियारों की एक बड़ी खेप बरामद की गई है, जो इस नेटवर्क की घातक मंशा को उजागर करती है।

क्या है यह शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN)

सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, शहजाद भट्टी नेटवर्क दरअसल एक आईएसआई-समर्थित टेरर-गैंगस्टर सिंडिकेट है। इसके मुखिया शहजाद भट्टी का सीधा नियंत्रण पाकिस्तान से होता है। इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचाना और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ना है। यह सिंडिकेट न केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नफरत फैलाने वाली सामग्री फैला रहा था, बल्कि देश के खिलाफ जासूसी की गतिविधियों में भी लिप्त पाया गया है। गृह मंत्रालय ने UAPA की धारा 35(1)(a) के तहत इस संगठन को कानून की पहली अनुसूची में शामिल कर लिया है।

14 राज्यों में फैला था नेटवर्क का जाल

जांच में यह चौकाने वाला तथ्य सामने आया है कि शहजाद भट्टी का नेटवर्क देश के 14 राज्यों में अपनी जड़ें जमा चुका था। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में इसके कुल 253 सक्रिय ऑपरेटिव पाए गए हैं। एक मल्टी-स्टेट क्रैकडाउन के दौरान इन सभी को पकड़ा गया। इससे पहले, इन संदिग्धों पर अलग-अलग राज्यों में हत्या, फिरौती और आर्म्स एक्ट जैसे सामान्य आपराधिक धाराओं के तहत मामले दर्ज होते थे, लेकिन अब UAPA के तहत मामला दर्ज होने से यह पूरा गिरोह एक प्रतिबंधित आतंकी इकाई के रूप में देखा जाएगा।

कैसे काम करता है हाइब्रिड वार का यह मॉडल

यह नेटवर्क युवाओं को लुभाने के लिए दाऊद इब्राहिम, मुन्ना झिंगाड़ा और अजमल गुर्जर जैसे अपराधियों के नाम का इस्तेमाल करता है। सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को आसान पैसा, आधुनिक हथियार और विदेश में सेटल होने का झूठा लालच दिया जाता है। यह प्रॉक्सी वार का एक ऐसा तरीका है जिसमें कट्टरपंथी संगठनों के पुराने कैडर के बजाय ऐसे बेरोजगार युवाओं को जोड़ा जाता है जिनका कोई पिछला आतंकी रिकॉर्ड नहीं होता। इन युवाओं का इस्तेमाल रेकी करने, हथियारों की सप्लाई करने और जरूरत पड़ने पर लोन वुल्फ हमले करने के लिए किया जाता है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन्हें पहचानना बेहद कठिन हो जाता है।

आतंकी संगठन घोषित होने के कानूनी परिणाम

शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के बाद सरकारी एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण अधिकार मिल गए हैं:

  • कठोर जमानत प्रावधान: UAPA के तहत आने के बाद अब इस सिंडिकेट से जुड़े आरोपियों को जमानत मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है। जमानत के नियम बेहद सख्त हो गए हैं।
  • सदस्यता ही अपराध: अब सिर्फ इस नेटवर्क से जुड़े होना, इसकी विचारधारा को बढ़ावा देना या भर्ती करना ही सीधा अपराध माना जाएगा।
  • पुलिस कस्टडी की अवधि: सामान्य कानूनों की तुलना में पुलिस को अब पूछताछ के लिए 15 दिन के बजाय 30 दिन की पुलिस कस्टडी मिल सकती है और बिना किसी डिफॉल्ट जमानत के 180 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
  • संपत्ति की कुर्की: जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों, जमीन और अन्य संपत्तियों को ट्रेस कर उन्हें जब्त या फ्रीज कर सकती हैं।
  • नार्को-टेरर पर प्रहार: यह नेटवर्क सीमा पार से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी से पैसा कमाता था, जिसे रोकने के लिए अब एजेंसियों के पास अधिक शक्ति है।
  • डिजिटल प्रोपेगैंडा पर रोक: सरकार अब कानूनी तौर पर इनके ऑनलाइन चैनलों को ब्लॉक करने और इनकी एन्क्रिप्टेड बातचीत को इंटरसेप्ट करने में सक्षम है।

इस बड़े फैसले के साथ ही, गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि शहजाद भट्टी नेटवर्क को एक स्थानीय गैंगस्टर गिरोह के तौर पर नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे के रूप में देखा जाएगा। इससे अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए और राज्य पुलिस बल बेहतर तालमेल के साथ मिलकर एक ही कानूनी दायरे में इस पूरे आतंकी ढांचे को ध्वस्त करने का काम करेंगे।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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