यूरोप भी पीछे छूट गया, पटना के एक होटल में यूनिसेफ अधिकारी को ऐसा क्या दिखा कि वे हैरान रह गईं राष्ट्रीय राजनीति 2 महीने पहले 99
यूनिसेफ की एक शीर्ष अधिकारी ने पटना के एक होटल में दिव्यांग कर्मचारियों के समावेशी माहौल को देखकर उसकी जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि ऐसा अनुभव उन्हें यूरोप के किसी भी बड़े शहर में देखने को नहीं मिला।

बिहार की वास्तविक तस्वीर और सोशल मीडिया का सच

सोशल मीडिया के दौर में अक्सर बिहार को एक ऐसे राज्य के रूप में पेश किया जाता है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा हुआ है। इंटरनेट पर बने मीम्स और नकारात्मक विमर्शों में राज्य की एक धुंधली तस्वीर दिखाई जाती है, जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों और उच्च पदस्थ अधिकारियों का बिहार के प्रति अनुभव इन धारणाओं को पूरी तरह गलत साबित कर रहा है। हाल ही में, यूनिसेफ इंडिया की फील्ड ऑफिस प्रमुख डॉ. मोनिका ओलेड्जका नीलसन ने पटना की एक ऐसी घटना साझा की है, जिसने पूरी दुनिया में बिहार की समावेशी सोच का लोहा मनवा दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यूनिसेफ की वरिष्ठ अधिकारी डॉ. मोनिका ओलेड्जका नीलसन ने हाल ही में कार्यभार संभालने के दौरान पटना में अपने आगमन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जब वे पहली बार पटना पहुंचीं और शहर में रहने के लिए जगह तलाश रही थीं, तो उन्होंने लेमन ट्री होटल में ठहरने का निर्णय लिया। चेक-इन के दौरान उन्हें एक ऐसा अनुभव मिला जिसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। होटल के एक स्टाफ सदस्य ने उनका स्वागत किया जो बोलने और सुनने में असमर्थ था। उस कर्मचारी ने एक विशेष बैज पहना हुआ था, जिस पर लिखा था कि यदि मेहमान अपनी बात लिखकर बताए, तो उन्हें सेवा करने में खुशी होगी। यह एक छोटा सा इशारा था, लेकिन इसने डॉ. मोनिका का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

यूरोप से बेहतर है बिहार की समावेशी व्यवस्था

अगली सुबह नाश्ते के समय डॉ. मोनिका ने देखा कि होटल के दो युवा कर्मचारी आपस में सांकेतिक भाषा यानी साइन लैंग्वेज में बातचीत कर रहे थे। उन्होंने न केवल इस दृश्य को देखा, बल्कि उन्होंने होटल के रिसेप्शनिस्ट से इस बारे में बात भी की। डॉ. मोनिका ने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया कि उन्होंने पूरी दुनिया और यूरोप के कई बड़े होटलों की यात्रा की है, लेकिन वहां भी इस प्रकार की समावेशी सोच को इतनी स्पष्टता के साथ अमल में लाते हुए नहीं देखा। उन्होंने जब रिसेप्शनिस्ट की सराहना की, तो उस कर्मचारी ने बड़े गर्व के साथ बताया कि लेमन ट्री की यह एक आधिकारिक नीति है कि वे दिव्यांगजनों को रोजगार के समान अवसर प्रदान करें।

दिव्यांगों के प्रति संवेदनशील समाज की जरूरत

डॉ. मोनिका ओलेड्जका नीलसन ने इस अनुभव को केवल एक घटना नहीं, बल्कि समावेशी समाज की एक मिसाल बताया है। उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता फैलाना काफी नहीं है, बल्कि वास्तविक पहल करना ज्यादा मायने रखता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को कार्यक्षेत्र में शामिल करना केवल उन्हें सहारा देने जैसा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है जहां प्रत्येक व्यक्ति सम्मान के साथ अपना योगदान दे सके। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर बिहार की छवि को लेकर कटाक्ष करने वालों के लिए एक करारा जवाब माना जा रहा है।

डॉ. मोनिका ओलेड्जका नीलसन का परिचय

डॉ. मोनिका ओलेड्जका नीलसन संयुक्त राष्ट्र की एक अनुभवी और वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय विकास पेशेवर हैं। उन्होंने अप्रैल 2026 में बिहार में यूनिसेफ इंडिया के फील्ड ऑफिस प्रमुख के रूप में अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली है। यूनिसेफ के साथ उनका सफर एक दशक से भी ज्यादा लंबा रहा है। अपने करियर के दौरान उन्होंने दुनिया भर में फील्ड ऑफिस के कामकाज, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और रणनीतिक प्रोग्रामिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दी हैं। उनका बिहार में यह अनुभव न केवल राज्य के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि बिहार की राजधानी पटना आधुनिकता और मानवीय संवेदनाओं के मामले में वैश्विक मानदंडों पर खरा उतर रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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