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3 घंटे पहले
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टैक्स पेशेवरों को क्यों भेजा गया संदेश
आयकर विभाग ने हाल ही में करीब 12,000 टैक्स पेशेवरों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को एसएमएस और ईमेल के जरिए विशेष नोटिस भेजा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आकलन वर्ष 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट को समय रहते दाखिल करना सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के मुताबिक, विभाग के संज्ञान में आया है कि टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर से आगे बढ़ाकर 21 अक्टूबर करने के बाद भी, बड़ी संख्या में रिपोर्ट अभी तक फाइल नहीं की गई हैं। इसी सुस्ती को देखते हुए विभाग ने यह कदम उठाया है।
सक्षम नज अभियान का विस्तार
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह संदेश उन चुनिंदा टैक्स पेशेवरों को लक्षित करके भेजे गए हैं, जिन्होंने पिछले वित्त वर्ष की तुलना में आकलन वर्ष 2026-27 के लिए बहुत कम ऑडिट रिपोर्ट (फॉर्म 3सीडी) जमा की हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इन पेशेवरों ने पिछले वर्ष की तुलना में 50 फीसदी से भी कम ऑडिट रिपोर्ट दाखिल की हैं। इस पूरी प्रक्रिया को सक्षम नज अभियान के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। यह आयकर विभाग की एक डेटा आधारित पहल है, जिसका उद्देश्य करदाताओं को सही समय पर जानकारी प्रदान करना और अनुपालन के लिए प्रेरित करना है। पहली बार केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इस पहल के दायरे में कर पेशेवरों को भी शामिल किया है, क्योंकि ये लोग टैक्स अनुपालन प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं।
ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़े और समय सीमा
आंकड़ों की बात करें तो आकलन वर्ष 2026-27 के लिए अब तक कुल 19.5 लाख से अधिक ऑडिट रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी हैं। हालांकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि में जमा हुई रिपोर्टों की तुलना में काफी कम है। आम तौर पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर तय होती है, लेकिन इस बार सीबीडीटी ने राहत देते हुए इसे 21 अक्टूबर तक विस्तारित कर दिया है। इसके साथ ही, जिन आईटीआर में ऑडिट की आवश्यकता होती है, उनकी अंतिम तिथि को भी बढ़ाकर 21 नवंबर कर दिया गया है। इसका मतलब है कि जिन करदाताओं को ऑडिट की प्रक्रिया से गुजरना है, उन्हें अपना आईटीआर फाइल करने के लिए 21 नवंबर तक का समय मिलेगा।
किन लोगों के लिए ऑडिट जरूरी है
आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, हर करदाता के लिए टैक्स ऑडिट अनिवार्य नहीं है। आयकर कानून की धारा 44AB के तहत, इसके लिए कुछ सीमाएं तय की गई हैं:
- ऐसे कारोबारी जिनका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करना जरूरी है।
- यदि कोई कारोबारी अपने कुल टर्नओवर का 5 फीसदी से कम हिस्सा ही नकद के रूप में प्राप्त करता है, तो उनके लिए यह सीमा बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है।
- पेशेवरों जैसे कि डॉक्टर, इंजीनियर या वकील, जिनकी सालाना कमाई 50 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें अनिवार्य रूप से ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी।
आयकर विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि करदाता समय रहते ऑडिट प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमानुसार, देरी या चूक होने पर करदाता को 1.5 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। इसलिए, विभाग ने सभी संबंधित पेशेवरों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना अपनी प्रक्रियाएं पूरी कर लें।
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