रांची के हर्षित की सफलता की कहानी: सिंगापुर से एमबीए और दिल्ली की नौकरी छोड़ शुरू किया अपना स्टार्टअप व्यापार 3 घंटे पहले 11
रांची के रहने वाले हर्षित ने विदेश से पढ़ाई और दिल्ली में लाखों की कॉर्पोरेट नौकरी को छोड़कर अपने शहर में ही सेराफिक ब्रांड की शुरुआत की है। आज वे कस्टमाइज्ड टंबलर और इको-फ्रेंडली कैंडल्स बनाकर हर महीने अच्छी कमाई कर रहे हैं।

कॉर्पोरेट की चकाचौंध को पीछे छोड़ा

आज के दौर में जब युवा बेहतर भविष्य की तलाश में बड़े शहरों की ओर भाग रहे हैं, वहीं रांची के रहने वाले हर्षित ने एक मिसाल कायम की है। हर्षित ने सिंगापुर से अपनी एमबीए की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद दिल्ली जैसे महानगर में कॉर्पोरेट जगत में एक बड़ी नौकरी जॉइन की। वहां उन्हें लाखों का वेतन मिलता था और उनका करियर ग्राफ काफी अच्छा चल रहा था। लेकिन जीवन के किसी मोड़ पर पारिवारिक कारणों के चलते उन्होंने नौकरी को अलविदा कह दिया और अपने गृह नगर रांची वापस आ गए। वापस आकर उन्होंने किसी और के यहां काम करने के बजाय खुद का कुछ शुरू करने का फैसला किया और अपने ब्रांड सेराफिक की नींव रखी।

सेराफिक के खास कस्टमाइज्ड उत्पाद

हर्षित के ब्रांड सेराफिक की पहचान कस्टमाइज्ड उत्पादों से है। उन्होंने बताया कि आजकल टंबलर और बोतलों का काफी चलन है। बॉलीवुड सितारों से लेकर आम लोग इसे फैशन के तौर पर देखते हैं। उनकी कंपनी ग्राहकों की पसंद के अनुसार टंबलर को कस्टमाइज करती है। लोग अपनी जरूरत और पसंद के हिसाब से उस पर नाम, फोटो या कोई विशेष डिजाइन लिखवाते हैं। इन उत्पादों की कीमत सामान्यतः ₹1000 से ₹1500 के बीच होती है। दिलचस्प बात यह है कि ये टंबलर खुद उनकी यूनिट में मैन्युफैक्चर किए जाते हैं और ये पानी को पूरे 24 घंटे तक ठंडा या गर्म रखने में सक्षम हैं।

रांची की पहली लेजर मशीन का इस्तेमाल

हर्षित ने अपने स्टार्टअप की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए रांची में पहली बार अपनी खुद की लेजर मशीन इंस्टॉल की है। यह मशीन ग्राहकों को कस्टमाइजेशन में ऐसी फिनिशिंग देती है जो आमतौर पर बाजार में नहीं मिलती। चाहे किसी को अपने दोस्त के लिए उपहार में 'कीप काम, कीप रिलैक्स' लिखवाना हो, डोरेमोन का चित्र बनवाना हो या किसी कंपनी को अपना नाम अंकित करवाना हो, सब कुछ उनकी लेजर मशीन से संभव है। खास बात यह है कि ये सभी उत्पाद यूएस एफडीए से स्वीकृत और पूरी तरह से प्रमाणित हैं।

इको-फ्रेंडली कैंडल्स का नया बाजार

टंबलर के अलावा, हर्षित का दूसरा मुख्य उत्पाद 100% सोया वैक्स से बनी इको-फ्रेंडली मोमबत्तियां हैं। ये मोमबत्तियां बाजार में मिलने वाली साधारण मोमबत्तियों से बिल्कुल अलग हैं। इनका निर्माण मधुमक्खी के छत्ते से निकलने वाले मोम से होता है और इसमें किसी भी तरह की पेट्रोलियम जेली या हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। एक कैंडल करीब 70 से 80 घंटे तक जलती है। हर्षण ने कॉफी और मोचा जैसी खुशबू वाली कैंडल्स बाजार में उतारी हैं, जो 400 ग्राम की होती हैं। उन्होंने बताया कि यह उत्पाद इतना सुरक्षित और प्राकृतिक है कि यदि इसे कोई खा भी ले, तो सेहत को नुकसान नहीं होगा। इसकी कीमत ₹500 से ₹1000 के बीच रखी गई है।

कमाई और भविष्य की राह

अपने व्यवसाय के बारे में बात करते हुए हर्षित ने बताया कि अभी उनके स्टार्टअप को शुरू हुए महज डेढ़ साल का समय हुआ है। इतने कम समय में ही लोग उनके उत्पादों को काफी पसंद कर रहे हैं। उन्होंने अपनी वेबसाइट के माध्यम से भी बिक्री की व्यवस्था की है। अभी वे हर महीने 50,000 से अधिक की कमाई कर रहे हैं। जिस तरह से उनके ग्राहकों की संख्या और मांग बढ़ रही है, उससे उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में उनका टर्नओवर और भी बेहतर होगा। वे अब अपने काम के जरिए लोगों को अपनी क्रिएटिविटी दिखाने का एक मंच भी दे रहे हैं, जिससे लोग अपने प्रियजनों के लिए यादगार तोहफे कस्टमाइज करवा पाते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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