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एक दिन पहले
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असफलता से मिली सीख
बिहार के नालंदा जिले के इस्लामपुर के रहने वाले 23 वर्षीय सूरज कुमार ने बिहार पुलिस में भर्ती होकर अपने परिवार का नाम रोशन किया है। वर्दी पहनने का जुनून रखने वाले सूरज के लिए यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर साबित कर दिया है कि यदि इरादे पक्के हों, तो कठिन से कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त किया जा सकता है।
कोचिंग और मेहनत का सफर
सूरज ने 12वीं कक्षा के बाद ही पुलिस की वर्दी पाने का सपना देख लिया था। अपनी तैयारी के बारे में बताते हुए सूरज कहते हैं कि पहली बार में वे लिखित परीक्षा पास नहीं कर सके थे, जिससे वे थोड़े निराश जरूर हुए लेकिन हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने पटना का रुख किया और रौशन आनंद सर की ज्ञानबिंदु कोचिंग में दाखिला लिया। इस दौरान उन्होंने लगभग 6000 रुपये कोचिंग फीस पर खर्च किए।
लिखित परीक्षा से फिजिकल तक की जंग
कोचिंग के दौरान सूरज ने ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से अपनी पढ़ाई जारी रखी। जैसे ही बिहार पुलिस की नई भर्ती की घोषणा हुई, उन्होंने पूरी गंभीरता से फॉर्म भरा और तैयारी शुरू कर दी। कड़ी मेहनत रंग लाई और उन्होंने लिखित परीक्षा में सफलता हासिल की। इसके बाद उन्होंने घर वापस आकर शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी फिजिकल टेस्ट की जमकर तैयारी की और अंततः उनका चयन बिहार पुलिस में हो गया।
साधारण परिवार से मिली बड़ी उपलब्धि
सूरज एक बेहद साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनकी मां गृहिणी हैं और पिता किसानी करते हैं। सूरज का कहना है कि जब मेरिट लिस्ट में उनका नाम आया, उस वक्त वह बाइक चला रहे थे और यह खबर सुनकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने अन्य युवाओं के लिए संदेश दिया है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। यदि पूरी ईमानदारी और लगन के साथ तैयारी की जाए, तो किसी भी प्रतियोगी परीक्षा को पास करना संभव है।
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